नई दिल्ली।केंद्र सरकार की नीतियों, नए श्रम संहिताओं और निजीकरण के खिलाफ बुधवार को देशव्यापी भारत बंद का आह्वान किया गया। इस बंद को 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और कई किसान संगठनों ने समर्थन दिया। हालांकि, इसका असर देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग दिखा।
उत्तर भारत शांत, पूर्वी राज्यों में हलचल
राजधानी दिल्ली में बाजार, दफ्तर और परिवहन सामान्य रूप से चलते रहे। प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों जैसे करोल बाग, चांदनी चौक और सरोजिनी नगर में सभी दुकानें खुली रहीं। दिल्ली मेट्रो और बस सेवाएं भी बिना किसी रुकावट के संचालित होती रहीं।
वहीं बंगाल, केरल, झारखंड और बिहार जैसे राज्यों में प्रदर्शन और चक्का जाम देखने को मिला। झारखंड में कोयला, बैंकिंग और अन्य क्षेत्रों पर आंशिक असर पड़ा। केरल में माकपा समर्थित ट्रेड यूनियनों के बंद से कई क्षेत्रों में पूरी तरह सन्नाटा रहा।

जंतर-मंतर पर हुआ प्रदर्शन
दिल्ली के जंतर-मंतर पर अखिल भारतीय केंद्रीय ट्रेड यूनियन परिषद (AICCTU) के नेतृत्व में सैकड़ों कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। पुलिस और प्रशासन ने यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे।
स्वास्थ्य कर्मियों का प्रतीकात्मक विरोध
सरकारी अस्पतालों के कर्मचारियों ने काली पट्टी और बैज लगाकर विरोध जताया। भोजनावकाश में जीबी पंत, सफदरजंग, लोकनायक, कलावती शरण सहित प्रमुख अस्पतालों में आम सभाएं की गईं। कर्मचारियों ने सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों का विरोध दर्ज कराया।
किसानों और सामाजिक संगठनों का समर्थन
इस हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा, SEWA (सेल्फ एम्प्लॉयड वूमेन्स एसोसिएशन), और ग्रामीण क्षेत्रों के संगठनों का समर्थन प्राप्त हुआ। पूर्व में कृषि कानूनों का विरोध कर चुके किसान संगठनों ने एकजुट होकर श्रमिक संगठनों के साथ सहयोग किया।
व्यापारी वर्ग ने भारत बंद से बनाई दूरी
अखिल भारतीय व्यापारी महासंघ और दिल्ली के प्रमुख व्यापार मंडलों ने भारत बंद को समर्थन नहीं दिया। सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि “व्यापारी राष्ट्रहित में काम करते रहेंगे। बाजारों को बंद करने का कोई औचित्य नहीं है।”




