छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में 14 अप्रैल को हुआ वेदांता पावर प्लांट का भीषण हादसा अब और दर्दनाक होता जा रहा है। इस हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है, जबकि 12 मजदूर अब भी अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
बीते कुछ घंटों में तीन और श्रमिकों की मौत ने परिवारों का दर्द और गहरा कर दिया। इनमें पश्चिम बंगाल के रहने वाले सुब्रतो जेना, जो रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में भर्ती थे, और उत्तर प्रदेश के किस्मत अली, जिनका इलाज रायपुर के कालडा अस्पताल में चल रहा था, शामिल हैं। एक अन्य श्रमिक की भी मौत की पुष्टि हुई है।
इस हादसे ने कई राज्यों के परिवारों को झकझोर दिया है। मृतकों में सिर्फ 5 श्रमिक छत्तीसगढ़ के थे, जबकि बाकी 18 अन्य राज्यों से रोजी-रोटी कमाने यहां आए थे। अब उनके घरों में मातम पसरा है कहीं बूढ़े माता-पिता का सहारा चला गया, तो कहीं बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया।
इस गंभीर मामले में पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और प्लांट हेड देवेंद्र पटेल सहित कुल 19 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1), 289 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुआवजे की घोषणा भी की गई है। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये देने का ऐलान किया है। वहीं प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये देने की घोषणा हुई है।
वेदांता प्रबंधन ने भी अपनी ओर से सहायता की घोषणा करते हुए मृतकों के परिवारों को 35-35 लाख रुपये और एक सदस्य को नौकरी देने का वादा किया है। साथ ही घायलों को 15-15 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की बात कही गई है।
लेकिन इन घोषणाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल अब भी खड़ा है क्या इन जिंदगियों की कीमत सिर्फ मुआवजा है, या इस हादसे के जिम्मेदारों को वास्तव में सजा मिलेगी?



