पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है, और भारत भी इस स्थिति को लेकर पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एक अहम उच्च स्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें देश की ऊर्जा जरूरतों और सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने पर गहन चर्चा हो रही है।
इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद हैं। बैठक का मुख्य फोकस यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत में तेल, गैस और उर्वरक की आपूर्ति पर कोई असर न पड़े।
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मौजूदा हालात को देखते हुए केंद्र सरकार पहले से ही सक्रिय मोड में है। ऊर्जा संसाधनों की उपलब्धता बनाए रखने के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं और उद्योगों के हितों की रक्षा भी प्राथमिकता में है।
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से फोन पर बातचीत कर क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की थी। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने हाल ही में क्षेत्र में महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा था कि ऐसी घटनाएं न सिर्फ क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालती हैं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन को भी बाधित करती हैं। उन्होंने समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी को निर्बाध बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
साथ ही, प्रधानमंत्री ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वहां की सरकार के सहयोग के प्रति आभार भी जताया।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार इस पूरे संकट पर करीबी नजर रखे हुए है और हर संभावित चुनौती से निपटने के लिए रणनीतिक तैयारी कर रही है।



