नई दिल्ली। संसद के मौजूदा सत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सियासी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देने की तैयारी में हैं। इस पहल में विपक्षी दल एकजुट नजर आ रहे हैं और इसकी अगुवाई ममता बनर्जी की पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्ताव पर लोकसभा के करीब 120 और राज्यसभा के 60 सांसदों के हस्ताक्षर हो चुके हैं। प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है। माना जा रहा है कि लोकसभा में स्पीकर पद से जुड़े प्रस्ताव पर चर्चा के बाद इस मुद्दे पर भी बहस हो सकती है।
विपक्षी दलों का समर्थन
इस मुद्दे पर विपक्षी एकजुटता बुधवार को साफ नजर आई। मल्लिकार्जुन खड़गे के कक्ष में हुई बैठक में कई प्रमुख नेताओं ने भाग लिया। बैठक में राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने भी तृणमूल कांग्रेस के प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके बाद महाभियोग नोटिस दाखिल करने के लिए जरूरी सांसदों के हस्ताक्षर जुटाए गए।
बंगाल चुनाव से जोड़कर देखी जा रही रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस इस मुद्दे को आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से जोड़कर देख रही है। पार्टी चाहती है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे को चुनावी बहस का केंद्र बनाया जाए।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान कई वैध मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। नोटिस में यह भी कहा गया है कि यह कार्रवाई सरकार के दबाव में की गई।
क्या है महाभियोग की प्रक्रिया
मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया लगभग वैसी ही है जैसी सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के जजों को हटाने की होती है।
इसमें दो आधार महत्वपूर्ण होते हैं—
- साबित दुर्व्यवहार
- अक्षमता
महाभियोग प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में लाया जा सकता है। इसे पारित कराने के लिए सदन के कुल सदस्यों का बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत का समर्थन जरूरी होता है।






