रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में जंबूरी आयोजन को लेकर बुधवार को तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने इस आयोजन में अनियमितताओं और संभावित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए सरकार से कई सवाल किए। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया, जिससे कुछ देर तक सदन में हंगामे की स्थिति बनी रही।
सदन की कार्यवाही के दौरान उमेश पटेल ने शिक्षा मंत्री से पूछा कि जंबूरी आयोजन के लिए निविदा प्रक्रिया कितनी बार अपनाई गई, यह कब-कब जारी हुई और इसे निरस्त करने की वजह क्या थी।
इस पर जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि जंबूरी आयोजन के लिए दो बार टेंडर जारी किया गया था। पहला टेंडर तकनीकी कारणों की वजह से रद्द करना पड़ा। इसके बाद नियमों में आवश्यक बदलाव कर 23 दिसंबर को दोबारा टेंडर जारी किया गया।
उमेश पटेल ने पूरक सवाल करते हुए यह भी पूछा कि क्या निविदा प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही काम शुरू कर दिया गया था और आखिर इसका आदेश किसे दिया गया था। मंत्री ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि टेंडर जारी होने से पहले कुछ काम राष्ट्रीय स्तर की टीम के हिस्से में था। नियमों में किया गया बदलाव भी नेशनल स्काउट-गाइड परिषद की अनुमति से किया गया है और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई और इसमें किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार नहीं हुआ।
हालांकि मंत्री के जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ। उमेश पटेल ने फिर सवाल उठाया कि यदि नियमों में बदलाव या डाउनग्रेड किया गया है, तो इसके लिए स्पष्ट मानदंड होना चाहिए और यह निर्णय किस स्तर पर लिया गया। मंत्री ने दोहराया कि परिषद की अनुमति से ही बदलाव किए गए हैं और स्काउट-गाइड परिषद कभी भंग नहीं होती।
मंत्री के जवाब के बाद विपक्षी विधायकों ने सरकार पर सवाल उठाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। जवाब को असंतोषजनक बताते हुए विपक्ष ने विरोध स्वरूप सदन से वॉकआउट कर दिया, जिससे कुछ समय तक विधानसभा का माहौल गरमा गया।






