भोपाल। मध्य प्रदेश में स्कूली शिक्षा की स्थिति को लेकर सियासत गरमा गई है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस विधायक कमलनाथ ने राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।
कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के एक लाख से अधिक पद खाली पड़े हैं। हैरानी की बात यह है कि 1895 स्कूल ऐसे हैं जहाँ एक भी शिक्षक नियुक्त नहीं है। सबसे ज्यादा संकट ग्रामीण इलाकों में देखने को मिल रहा है, जहाँ बच्चों को बुनियादी शिक्षा तक नसीब नहीं हो पा रही।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश के 435 स्कूलों में एक भी छात्र का नामांकन नहीं हुआ है, जो शिक्षा व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार हर महीने करीब 5,000 करोड़ रुपये का कर्ज ले रही है, लेकिन शिक्षा जैसी मूलभूत जरूरतों पर ध्यान देने के बजाय इवेंट और प्रचार में पैसा खर्च किया जा रहा है।
कमलनाथ ने मांग की कि ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में तत्काल शिक्षकों की भर्ती की जाए और सभी रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए। उन्होंने कहा, “शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार है। किसी भी हाल में प्रदेश के बच्चों के भविष्य से समझौता नहीं होना चाहिए।”
प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठे इन सवालों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और शिक्षा सुधार के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।



