छत्तीसगढ़ की राजनीतिक राजधानी दुर्ग में कांग्रेस पार्टी आंतरिक कलह की आग में जल रही है। पूर्व विधायक अरुण वोरा और जिला कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बक्लीवाल के बीच गहरी खाई ने पार्टी को कमजोर कर दिया है। गैरवोटिंग और लगातार हार का शिकार बन रही दुर्ग कांग्रेस अब विपक्षी मोर्चे पर भी बिखरी हुई नजर आ रही है।
राजनीतिक गलियारों में खबरें गूंज रही हैं कि ये रंजिशें 2023 विधानसभा चुनाव से चली आ रही हैं, जब टिकट की होड़ ने दोनों गुटों को आमने-सामने ला खड़ा किया।
सूत्रों के हवाले से बताया जाता है कि अरुण वोरा निवास ही धीरज बक्लीवाल की राजनीतिक पौधशाला था। यहां से ही महापौर का चयन हुआ था। लेकिन महापौर मतदान के दौरान संदीप वोरा का वायरल ऑडियो सब कुछ बदल गया।
ऑडियो में संदीप एक पार्षद को धमकाते सुनाई देते हैं, “धीरज बक्लीवाल को वोट दो, वरना…”। इस घटना ने दोनों के रिश्तों में जहर घोल दिया। अब जिला कांग्रेस कमेटी की बैठकों में वोरा गुट और बक्लीवाल गुट अलग-अलग नजर आते हैं। विपक्षी मुद्दों—जैसे बेरोजगारी, महंगाई और स्थानीय विकास—पर भी दोनों धड़े अलग-अलग बयानबाजी करते दिखते हैं।
पिछले विधानसभा चुनाव में धीरज बक्लीवाल ने अरुण वोरा की सीट पर टिकट की मांग की, जिससे गुटबाजी चरम पर पहुंच गई। नतीजा? दुर्ग शहर विधानसभा और निगम चुनावों में करारी हार। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “ये आंतरिक जंग ने हमें भाजपा के हवाले कर दिया।

एकजुटता के बिना विपक्ष का क्या भविष्य?”। राजनीतिक विश्लेषक मनोज वर्मा का मत है, “दुर्ग कांग्रेस दो टुकड़ों में बंट चुकी है। आगामी नगर निगम और विधानसभा चुनावों में ये कलह भारी पड़ेगी।”

कांग्रेस आलाकमान को अब हस्तक्षेप करना होगा, वरना दुर्ग में विपक्ष की कमजोरी भाजपा को फायदा पहुंचाएगी। क्या वोरा-बक्लीवाल विवाद सुलझेगा, या ये सिलसिला जारी रहेगा? स्थानीय कार्यकर्ता चिंतित हैं कि पार्टी का आधार वोट पूरी तरह खिसक सकता है।



