देश के एयरपोर्ट्स पर अब तक यात्रियों को चाय और समोसे जैसी सामान्य चीज़ों के लिए भी जेब ढीली करनी पड़ती थी। 300 रुपये की चाय और 350 रुपये का समोसा आम लोगों के लिए एक तरह से मजबूरी बन चुका था। लेकिन अब तस्वीर बदल गई है।
सरकार ने “उड़ान यात्री कैफे” की शुरुआत के साथ एयरपोर्ट पर खाने-पीने की कीमतों में बड़ी राहत दी है। अब यात्रियों को वही चाय सिर्फ 10 रुपये में और समोसा 20 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है।
इस बदलाव के पीछे संसद में उठी एक सशक्त आवाज़ को अहम माना जा रहा है। आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चढ्ढा ने एयरपोर्ट पर मनमाने दामों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया था। उन्होंने सवाल किया था कि क्या हवाई यात्रा करने वाला हर व्यक्ति अमीर होता है? क्या आम मध्यमवर्गीय यात्री को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी भारी कीमत चुकानी चाहिए?
उनकी इस पहल के बाद सरकार ने दखल दिया और “उड़ान यात्री कैफे” के ज़रिए सस्ती दरों पर खान-पान उपलब्ध कराने की व्यवस्था लागू की।
यह फैसला उन लोगों के लिए भी एक संदेश है जो कहते हैं कि राजनीति में मुद्दे उठाने से कुछ नहीं बदलता। एयरपोर्ट पर सस्ती चाय और समोसा सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि यह आम यात्रियों के सम्मान और राहत का प्रतीक बन गया है।
अब भले ही लग्ज़री सेवाएँ अपने स्थान पर बनी रहें, लेकिन आम यात्री की जेब पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ जरूर कम हुआ है।







