रायपुर/महासमुंद।महासमुंद जिले के बिरकोनी औद्योगिक क्षेत्र में गुरुवार को छत्तीसगढ़ी अस्मिता और अधिकारों की गूंज सुनाई दी। सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज के बैनर तले निकाली जा रही “छत्तीसगढ़ी महतारी अस्मिता रथयात्रा” का विभिन्न गांवों में गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
बरबसपुर, बड़गांव, नवापारा, अछरीडीह, बिरकोनी और खट्टीडीह होते हुए यह रथ बाजार चौक पहुँचा, जहाँ विशाल आमसभा का आयोजन हुआ। सभा में किसान, मजदूर, युवा और महिलाओं की सैकड़ों की भीड़ उमड़ी। कई स्थानों पर ग्रामीणों ने रथ की आरती उतारकर स्वागत किया और बड़ी संख्या में लोगों ने संगठन की सदस्यता भी ग्रहण की।
सभा को संबोधित करते हुए राज्य निर्माण संग्राम सेनानी एवं किसान नेता लालाराम वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती पर बाहरी शोषण और अन्याय के खिलाफ अब जनजागरण की नई शुरुआत हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि बिरकोनी सोसायटी के हजारों किसानों को करोड़ों रुपये के कथित फर्जी ऋण से मुक्ति दिलाने में संगठन की अहम भूमिका रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि सिरपुर क्षेत्र के 40 से 50 गांवों को हाथियों के आतंक से राहत दिलाने तथा कोड़ार बांध से जुड़े विवादित अनुबंध को निरस्त कराने की लड़ाई भी किसानों के हित में लड़ी गई। उनके अनुसार, इन प्रयासों से करीब 70 गांवों के किसानों को सिंचाई सुविधा का लाभ मिला।
वर्मा ने 3100 रुपये समर्थन मूल्य के मुद्दे को भी संगठन की सतत लड़ाई का परिणाम बताया।

सभा के दौरान “छत्तीसगढ़ के शोषकों, छत्तीसगढ़ छोड़ दो” जैसे नारे भी लगाए गए। वक्ताओं ने छत्तीसगढ़ी भाषा, संस्कृति और राज्य के इतिहास को सम्मान दिलाने की बात कही।
कार्यक्रम को धन्नूलाल साहू, आदिवासी नेता अशोक कश्यप, नंदकुमार साहू, रूपसिंह निषाद, शत्रुधन साहू, लोक कलाकार लक्ष्मी निषाद, बृजबिहारी साहू, श्रीमती राधा बाई सिन्हा और श्यामाबाई ध्रुव सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया।
संयोजक जागेश्वर प्रसाद ने बताया कि यह रथयात्रा प्रदेशभर में चलाकर छत्तीसगढ़िया समाज को एकजुट करने का अभियान जारी रहेगा। उनका कहना है कि यह आंदोलन केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक अस्मिता से जुड़ा अभियान है।







