बालोद जिले में सरकारी धान परिवहन व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कागज़ों में सब कुछ दुरुस्त दिखाने वाली व्यवस्था जमीनी हकीकत में ढीली साबित होती नजर आ रही है। गुंडरदेही ब्लॉक के सकरौद खरीदी केंद्र से जगतरा संग्रहण केंद्र के लिए भेजे गए धान के एक ट्रक से रास्ते में ही 100 बोरा धान कम हो गया।
जब ट्रक जगतरा पहुंचा और धर्मकांटा में तौल हुआ, तो दस्तावेज़ों में दर्ज 1000 बोरों के बजाय केवल 900 बोरे ही पाए गए। इतना बड़ा अंतर सामने आते ही संग्रहण केंद्र प्रभारी ने ट्रक खाली कराने से इनकार कर दिया। धान से लदा ट्रक शनिवार तक धर्मकांटा के पास खड़ा रहा और पूरे मामले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी।
कागज कुछ और, वजन कुछ और
शुक्रवार को ट्रक क्रमांक CG 08 AW 3611 में 1000 बोरा धान लोड होने की एंट्री स्लिप में दर्ज की गई थी। समिति प्रभारी द्वारा जारी पावती में भी यही संख्या दर्ज है। लेकिन जब वास्तविक तौल हुई तो करीब 100 बोरा कम निकला। सवाल उठता है कि आखिर 100 बोरा धान हवा में कैसे गायब हो गया?
ट्रांसपोर्टर का पुराना रिकॉर्ड भी संदिग्ध
धान परिवहन का जिम्मा दमन दीप ट्रांसपोर्ट को सौंपा गया था। इससे पहले भी इसी ट्रांसपोर्टर का एक ट्रक पांच दिन तक लापता रहा था और बाद में जंगल में मिला था, जिसमें 297 बोरा धान कम पाया गया था। एक ही ट्रांसपोर्टर के वाहनों में बार-बार धान की कमी सामने आना कई आशंकाओं को जन्म दे रहा है।

चालक और प्रभारी के बयान में विरोधाभास
ट्रक चालक अभिषेक बैज का कहना है कि लोडिंग के समय ही उसने प्रभारी को ‘एक छल्ली’ कम होने की जानकारी दी थी, लेकिन इसके बावजूद 1000 बोरा दर्शाते हुए पर्ची काट दी गई। चालक का दावा है कि उसके पीछे एक अन्य ट्रक चल रहा था, इसलिए रास्ते में चोरी या हेराफेरी की संभावना नहीं है।
वहीं सकरौद समिति प्रभारी भेकुराम चंद्राकर ने खुद को अवकाश पर बताते हुए जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। उनका कहना है कि यदि कमी हुई है तो उसकी पूर्ति कर दी जाएगी। लेकिन बड़ा सवाल यही है — अगर लोडिंग कम थी, तो 1000 बोरे की एंट्री क्यों की गई?
प्रशासन ने दिए जांच के संकेत
जिला विपणन अधिकारी (DMO) टिकेंद्र राठौर ने कहा कि मामला गंभीर है। यदि बोरियों की कमी पाई गई है, तो संबंधित प्रभारी से स्पष्टीकरण लिया जाएगा। यदि ट्रांसपोर्टर की लापरवाही या संलिप्तता सामने आती है, तो उसकी सुरक्षा निधि से राशि की वसूली की जाएगी।






