सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज के बैनर तले निकाली जा रही “छत्तीसगढ़ी महतारी अस्मिता रथ यात्रा” अपने 15वें दिन भोरिंग पहुंची, जहां इसका भव्य स्वागत किया गया। तेंदूवाही, कुकराडीह, भोरिंग, जोबा और गढ़सिवनी में यात्रा का उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला।
भोरिंग नगर पंचायत में माताओं-बहनों और किसानों ने पारंपरिक तरीके से रथ की आरती उतारी और पूरे नगर के वार्डों में रथ को घुमाया। जगह-जगह नुक्कड़ सभाएं आयोजित की गईं, जिनमें स्थानीय लोगों की बड़ी भागीदारी रही।
सैकड़ों लोग बने सदस्य
यात्रा के दौरान सदस्यता अभियान भी चलाया गया। किसान, जवान और महिलाओं ने उत्साह के साथ “सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज” की सदस्यता ग्रहण की। आयोजकों के मुताबिक, सर्व समाज के सैकड़ों लोगों ने संगठन से जुड़कर समर्थन जताया।

नेताओं ने रखे विचार
सभा को राज्य आंदोलन के सेनानी एवं किसान नेता लाला राम वर्मा, छन्नू लाल साहू, अशोक कश्यप, नंदकुमार साहू, बलराम साहू, राधा बाई सिन्हा, श्यामा बाई ध्रुव, धनेश्वर यादव, टुकेश्वरी ध्रुव, लोक कलाकार लक्ष्मी निषाद, जनकूराम साहू और बृज बिहारी साहू सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया।
रथयात्रा के प्रभारी लाला राम वर्मा ने कहा कि राज्य गठन के 25 वर्ष और छत्तीसगढ़ी भाषा को राजभाषा का दर्जा मिले 18 साल बीत जाने के बावजूद स्थानीय लोगों को अपेक्षित सम्मान नहीं मिल पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बाहरी राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तक्षेप के कारण छत्तीसगढ़िया समाज को लगातार उपेक्षा और शोषण का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि भाषा, संस्कृति, देवी-देवताओं और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के सम्मान की रक्षा के लिए समाज को एक मंच पर आना होगा।
वहीं, छन्नू लाल साहू ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि पार्टी और जातिगत सीमाओं से ऊपर उठकर संगठित संघर्ष ही छत्तीसगढ़ी अस्मिता की रक्षा का रास्ता है।
आयोजकों का कहना है कि यह रथ यात्रा गांव-गांव पहुंचकर समाज को एकजुट करने और “शोषण मुक्त छत्तीसगढ़” के संकल्प को मजबूत करने का प्रयास है।







