रायपुर में पुलिस कमिश्नरी लागू है—लेकिन यह सख़्ती सिर्फ़ पोस्टर, प्रेस विज्ञप्ति और भाषणों तक ही सीमित नज़र आती है। एक वायरल वीडियो, जिसमें एक बुज़ुर्ग के साथ खुलेआम गाली-गलौज और बदसलूकी होती दिख रही है, पूरे देश में रायपुर की किरकिरी करा रहा है। सवाल यह है कि कमिश्नरी सिस्टम होने के बावजूद ऐसी दबंगई कैसे बेख़ौफ चल रही है?
वीडियो में सामने आया नाम—पूर्व मेयर एजाज़ ढेबर के भतीजे शोएब ढेबर—पहली बार विवादों में नहीं है। इससे पहले भी फायरिंग, मारपीट, पुलिस को धमकाने और जेल में बिना अनुमति घुसने जैसे गंभीर मामलों में यही नाम दर्ज हो चुका है। हर बार कहानी वही—FIR दर्ज हुई, लेकिन सख़्ती नदारद रही।
कमिश्नरी सिस्टम का दावा था कि अपराध पर तुरंत कार्रवाई होगी, रसूख़ नहीं चलेगा। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि एक बुज़ुर्ग का अपमान देशभर में वायरल होने के बाद भी प्रशासन की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है। क्या कमिश्नरी सिस्टम रसूख़ देखकर काम करता है?
अगर यही हरकत कोई आम नागरिक करता, तो अब तक हथकड़ी, थाने की फोटो और जेल की सलाखें दिखाई देतीं। लेकिन यहां नाम असरदार है, इसलिए कानून असहज नज़र आता है। यह सिर्फ़ एक घटना नहीं, बल्कि कमिश्नरी व्यवस्था की साख पर सीधा हमला है।
अब भी अगर इस मामले में सिर्फ़ खानापूर्ति हुई, तो यह मान लिया जाएगा कि रायपुर में पुलिस कमिश्नरी नहीं, दबंगई का सिस्टम चलता है।



