कोरबा।मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद धान खरीदी की अवधि दो दिन बढ़ाए जाने का असर कोरबा जिले में सीमित ही नजर आया। 5 और 6 फरवरी को जिले के केवल 115 किसान ही समर्थन मूल्य पर धान बेच पाए। इस दौरान कुल 8,980.8 क्विंटल धान की खरीदी हुई, जिसके एवज में किसानों को लगभग 2 करोड़ 12 लाख 75 हजार रुपये का भुगतान दर्ज किया गया।
जिले की 41 समितियों के अंतर्गत संचालित 65 उपार्जन केंद्रों में अब तक 43,861 किसानों से 27.47 लाख क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी है। इसकी कुल कीमत 650 करोड़ 78 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है।
8,875 किसान अब भी वंचित
बढ़ी मियाद के बावजूद जिले के कुल 52,566 पंजीकृत किसानों में से 8,875 किसान (16.57%) अब तक धान नहीं बेच सके। वहीं जिले को 31.19 लाख क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य मिला था, जिसके मुकाबले कोरबा अभी भी 11.92 फीसदी पीछे चल रहा है। यानी लक्ष्य से 3.71 लाख क्विंटल धान की कमी दर्ज की गई है।
खरीदी के बाद उठाव बना सबसे बड़ी चुनौती
धान खरीदी के बाद अब प्रशासन के सामने सबसे गंभीर समस्या धान उठाव (परिवहन) की खड़ी हो गई है। जिले के विभिन्न उपार्जन केंद्रों में 10.92 लाख क्विंटल धान अब भी जाम पड़ा है, जिसकी अनुमानित कीमत 251 करोड़ रुपये से अधिक है। चिंताजनक बात यह है कि इसमें से करीब ढाई लाख क्विंटल धान का डीओ (डिलीवरी ऑर्डर) अब तक जारी ही नहीं हो पाया है।
रेशियो बदलाव की आशंका, मिलर्स पीछे हटे
सूत्रों के अनुसार, राइस मिलर्स को धान-चावल रेशियो में संभावित बदलाव की आशंका है। इसी कारण कई मिलर्स ऑनलाइन डीओ रिक्वेस्ट डालने से बच रहे हैं, जिससे उठाव की प्रक्रिया और धीमी होती जा रही है। बढ़ती धूप और खुले में पड़े धान के चलते समितियों में शॉर्टेज का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है।
इन केंद्रों में हालात सबसे ज्यादा गंभीर
30 हजार क्विंटल से अधिक धान जाम (5 केंद्र):
नवापारा, बरपाली (कोरबा), बरपाली (बरपाली), भैसमा, सिरमिना
इनमें बरपाली (कोरबा) केंद्र सबसे अधिक प्रभावित है, जो हाथी प्रभावित और वनांचल क्षेत्र होने के कारण पहले से ही संवेदनशील माना जाता है।
20 हजार क्विंटल से अधिक धान जाम (15 केंद्र):
अखरापाली, उतरदा, बोईदा, कनकी, केरवाद्वारी, कोथारी, कोरबी (पोंडी उपरोड़ा), चैतमा, चिकनीपाली, बेहरचुंवा, फरसवानी, बिंझरा, रामपुर, श्यांग, सोहागपुर
नियमों को ताक पर रखने के आरोप
समिति प्रबंधकों ने राइस मिलर्स पर नियमों की अनदेखी करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मिलर्स 100 प्रतिशत धर्मकांटा तौल का दबाव बना रहे हैं, जबकि सरकारी नियमों के तहत केवल 10 से 20 प्रतिशत रैंडम तौल का ही प्रावधान है। नियम मानने से इनकार करने पर समय पर गाड़ियां न लगाने की धमकी भी दी जा रही है।
DMO का पक्ष
इस पूरे मामले पर जिला विपणन अधिकारी (DMO) ऋतुराज देवांगन ने बताया कि राइस मिलर्स द्वारा ऑनलाइन डीओ रिक्वेस्ट नहीं डाले जाने के कारण ढाई लाख क्विंटल धान का डीओ लंबित है। हालांकि शेष धान का उठाव प्राथमिकता के आधार पर कराया जा रहा है और औसतन 50 हजार क्विंटल प्रतिदिन उठाव हो रहा है।







