पटेवा में गूंजा छत्तीसगढ़ी अस्मिता का स्वर, हजारों किसान-छात्र-मातृशक्ति रथ यात्रा से जुड़े

Madhya Bharat Desk
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रायपुर।सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज के बैनर तले निकाली जा रही “छत्तीसगढ़ी महतारी अस्मिता रथ यात्रा” अपने 13वें दिन पटेवा क्षेत्र पहुंची, जहां गांव-गांव इसका भव्य स्वागत किया गया। रामखेड़ा, कोकड़ी, तुमसा, खट्टा, पटेवा, जोगीडीपा, बोडरा, नवागांव और चुहरी सहित आसपास के इलाकों में रथ यात्रा के आगमन पर छत्तीसगढ़ी जागरण गीतों के साथ महतारी की आरती उतारी गई।

इस जनजागरण अभियान से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में किसान, छात्र, जवान और मातृशक्ति ने संगठन की सदस्यता ग्रहण की। विभिन्न गांवों में आयोजित सभाओं में राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं किसान नेताओं ने छत्तीसगढ़ी अस्मिता, जल-जंगल-जमीन और किसानों के अधिकारों को लेकर हुंकार भरी।

सभाओं को संबोधित करते हुए राज्य निर्माण संग्राम सेनानी जागेश्वर प्रसाद, किसान मोर्चा के महेंद्र कौशिक, शिवनारायण ताम्रकार, छन्नू साहू, नंद कुमार साहू, अशोक कश्यप, बृजबिहारी साहू, अवधराम साहू और जोगीराम साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ की मूल पहचान और संसाधनों पर लगातार हमले हो रहे हैं, जिन्हें अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

रथ यात्रा के प्रभारी लालाराम वर्मा ने कहा कि महासमुंद जिले के लगभग 70 गांवों के लाखों किसानों की सिंचाई का एकमात्र आधार रहे कोडार बांध को पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अवैध रूप से करणी कृपा स्टील पावर प्लांट को सौंप दिया गया था। उन्होंने दावा किया कि संगठन के संघर्ष के चलते ही इस मुद्दे को सार्वजनिक मंच पर लाया गया और किसानों के हक की लड़ाई आगे बढ़ी।

उन्होंने आगे बताया कि छत्तीसगढ़ी महतारी की प्रतिमा को बंधक बनाए जाने के मामले में महासमुंद कलेक्टर, एसपी, तहसीलदार, तुमगांव थाना प्रभारी और एसडीओपी के खिलाफ न्यायालय में प्रकरण दर्ज कर महतारी को कानूनी रूप से मुक्त कराया गया।

लालाराम वर्मा ने साफ कहा कि अब यह रथ यात्रा छत्तीसगढ़ी भाषा, संस्कृति और अस्मिता को शोषण से मुक्त कराने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रही है। तुमगांव-सिरपुर क्षेत्र में दो फसली जमीन, जल-जंगल-जमीन, जैव विविधता और विश्व धरोहर सिरपुर को औद्योगिक प्रदूषण से बचाने के लिए भी आंदोलन जारी रहेगा।

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