राष्ट्रपति शासन के बाद मणिपुर को नया नेतृत्व: ताइक्वांडो मास्टर बनेंगे मुख्यमंत्री

Madhya Bharat Desk
2 Min Read

नई दिल्ली।लंबे राजनीतिक असमंजस और राष्ट्रपति शासन के बाद मणिपुर में एक बार फिर लोकतांत्रिक सरकार बनने की तस्वीर साफ होती दिख रही है। भाजपा विधायकों ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और अंतरराष्ट्रीय स्तर के ताइक्वांडो मास्टर युमनाम खेमचंद सिंह को अपना नेता चुन लिया है। इसके साथ ही राज्य को जल्द नया मुख्यमंत्री मिलने वाला है।

13 फरवरी को लागू राष्ट्रपति शासन के बाद यह पहला बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। खास बात यह है कि खेमचंद सिंह केवल एक अनुभवी राजनेता ही नहीं, बल्कि खेल जगत से जुड़ा ऐसा चेहरा हैं, जिनकी पहचान अनुशासन और संतुलन से जुड़ी रही है।

जातीय तनाव से लंबे समय तक जूझ चुके मणिपुर में भाजपा अब बेहद सोच-समझकर सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश में है। मैतेई समुदाय से आने वाले खेमचंद सिंह को मुख्यमंत्री बनाते हुए पार्टी दो उपमुख्यमंत्री नियुक्त करने के फॉर्मूले पर भी गंभीरता से विचार कर रही है। माना जा रहा है कि एक उपमुख्यमंत्री कुकी और दूसरा नागा समुदाय से हो सकता है, ताकि सभी वर्गों को सत्ता में प्रतिनिधित्व का भरोसा मिले।

कुकी समाज से आने वाली पूर्व मंत्री नेमचा किपगेन इस दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं। उनका क्षेत्रीय प्रभाव और संगठनात्मक पकड़ भाजपा के लिए अहम मानी जा रही है।

62 वर्षीय खेमचंद सिंह इंफाल के सिंगजामेई विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार विधायक हैं और फिलहाल उन्हें राज्य में सबसे स्वीकार्य और संतुलित नेतृत्व के रूप में देखा जा रहा है। दिसंबर में उनका उखरूल और कामजोंग के कुकी बहुल गांवों का दौरा राजनीतिक हलकों में खासा चर्चा में रहा था। यह किसी मैतेई विधायक की ओर से पहली ऐसी पहल थी, जिसे जातीय मेल-मिलाप की दिशा में बड़ा और सकारात्मक संकेत माना गया।

अब सबकी नजरें शपथ ग्रहण की तारीख और नई मंत्रिपरिषद की संरचना पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि मणिपुर की राजनीति में स्थिरता और भरोसे का नया अध्याय कितना मजबूत होगा।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment