रायपुर। छत्तीसगढ़ी अस्मिता, भाषा और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के संकल्प के साथ निकाली जा रही “छत्तीसगढ़ी महतारी अस्मिता रथ यात्रा” अपने पांचवें दिन विभिन्न ग्रामीण अंचलों से होते हुए आगे बढ़ी। सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज के बैनर तले निकली यह रथ यात्रा नरियारा, बरभांठा, मोखला, ओड़का, आरंग, बेहर, रसनी और खमतराई गांवों में पहुँची।
जैसे ही छत्तीसगढ़ी महतारी का रथ गांवों में प्रवेश करता, पूरा वातावरण “छत्तीसगढ़ी महतारी की जय”, “सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज जिंदाबाद” जैसे गगनभेदी नारों से गूंज उठता। ग्रामीणों में रथ यात्रा को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। किसान, जवान, महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में इसमें शामिल हुए।
रथ यात्रा के दौरान हर गांव में नुक्कड़ सभाओं का आयोजन किया गया, जहाँ छत्तीसगढ़ी महतारी की अस्मिता, छत्तीसगढ़ियों के शोषण के खिलाफ संघर्ष और भाषा-संस्कृति के सम्मान का मुद्दा प्रमुख रूप से रखा गया। इन विचारों से प्रभावित होकर सैकड़ों ग्रामीणों ने संगठन की सदस्यता भी ग्रहण की।
नुक्कड़ सभाओं को संबोधित करते हुए राज्य आंदोलनकारी एवं रथ यात्रा प्रभारी लालाराम वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ के निर्माण, छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा दिलाने और किसानों को समर्थन मूल्य दिलाने के आंदोलनों का हिस्सा बनने का उन्हें अवसर मिला।
अब समय है कि छत्तीसगढ़ी महतारी की अस्मिता और इतिहास पुरुषों के सम्मान के लिए सभी छत्तीसगढ़िया एकजुट हों।
उन्होंने अपील की कि भाषा, संस्कृति, किसान-मजदूर और बेरोजगारों के हितों की रक्षा के लिए पार्टी और जाति की सीमाओं से ऊपर उठकर संगठित संघर्ष करना होगा।
आयोजकों के अनुसार यह रथ यात्रा 1 फरवरी को विश्व धरोहर स्थल सिरपुर पहुँचेगी, जहाँ एक बड़ा जनसमागम प्रस्तावित है।







