रायपुर/महासमुंद।छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को लेकर किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। राज्य सरकार द्वारा धान खरीदी की अंतिम तारीख 31 जनवरी तय की गई है, लेकिन अब इस अवधि को बढ़ाने के संकेत मिलने लगे हैं। कृषि मंत्री रामविचार नेताम और सहकारिता मंत्री केदार कश्यप के हालिया बयानों से किसानों में उम्मीद जगी है।
सरकार के स्तर पर मंथन
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा है कि बड़ी संख्या में किसानों की ओर से धान खरीदी की तारीख बढ़ाने की मांग सामने आई है। इस मुद्दे पर वे जल्द ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात कर गंभीर चर्चा करेंगे। मंत्री ने माना कि कई किसान अभी भी अपनी उपज नहीं बेच पाए हैं और उन्हें अतिरिक्त समय की आवश्यकता है।
फिलहाल सरकार की ओर से टोकन काटने की प्रक्रिया बंद कर दी गई है। जानकारी के मुताबिक करीब दो लाख किसान ऐसे हैं जिनके टोकन अब तक नहीं कट पाए, जिससे वे समर्थन मूल्य पर धान बेचने से वंचित हो सकते हैं। इस मसले को लेकर कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और भाजपा किसान मोर्चा ने भी सरकार पर दबाव बनाया है।
महासमुंद में किसानों की बढ़ी परेशानी
महासमुंद जिले में स्थिति और भी गंभीर बनी हुई है। कई किसानों का कहना है कि उनके धान का सत्यापन पहले ही हो चुका है, इसके बावजूद उन्हें टोकन नहीं मिला। ग्रामीण सेवा सहकारी समिति भूकेल में रोजाना किसान पहुंच रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
किसानों ने बताया कि उन्होंने कलेक्टर महासमुंद से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन कॉल रिसीव नहीं किए गए। इससे किसानों में नाराजगी और असंतोष बढ़ गया है। किसानों का साफ कहना है कि यदि समय रहते टोकन नहीं मिला, तो उन्हें अपनी फसल औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
राजनीतिक दलों का दबाव
धान खरीदी के मुद्दे पर किसान संगठनों के साथ-साथ राजनीतिक दल भी मुखर हो गए हैं। कांग्रेस, भाजपा किसान मोर्चा और अन्य संगठनों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर धान खरीदी की अवधि बढ़ाने और टोकन व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है।
राहत की उम्मीद बरकरार
कृषि मंत्री की मुख्यमंत्री से प्रस्तावित मुलाकात के बाद किसानों में उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है। यदि सरकार धान खरीदी की तारीख बढ़ाने का फैसला लेती है, तो हजारों किसानों को राहत मिल सकती है। हालांकि महासमुंद जैसे जिलों में टोकन की समस्या अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। किसानों की मांग है कि सरकार जल्द निर्णय लेकर उनकी परेशानी का स्थायी समाधान करे।







