नई दिल्ली।करीब 18 वर्षों तक चली जटिल और लंबी वार्ताओं के बाद भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने 27 जनवरी 2026 को आखिरकार ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर सहमति जता दी। यह बड़ा ऐलान 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन के दौरान हुआ, जिसकी सह-अध्यक्षता यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को “Mother of All Trade Deals” करार देते हुए कहा कि यह सिर्फ आर्थिक साझेदारी नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और कानून के शासन के प्रति साझा प्रतिबद्धता को भी नई मजबूती देगा।
आम लोगों और बाजार पर क्या असर पड़ेगा?
इस डील के बाद यूरोप से आयात होने वाले कई उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ते हो जाएंगे।
यूरोपीय वाइन, बीयर, स्पिरिट और जैतून के तेल पर आयात शुल्क में बड़ी कटौती
कारों, मशीनरी और औद्योगिक उपकरणों पर टैक्स में राहत
मेडिकल और सर्जिकल उपकरणों पर 90 प्रतिशत तक शुल्क समाप्त
रसायन, विमान और अंतरिक्ष तकनीक से जुड़े उत्पादों पर भी टैक्स लगभग खत्म
ग्रीन एनर्जी और क्लाइमेट फंड पर बड़ा दांव
इस समझौते के तहत यूरोपीय संघ अगले दो वर्षों में भारत को 500 मिलियन यूरो की वित्तीय सहायता देगा।
यह फंड मुख्य रूप से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने, स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं और औद्योगिक विकास में इस्तेमाल होगा।
इसके साथ ही 2026 की पहली छमाही में ‘क्लाइमेट एक्शन प्लेटफॉर्म’ शुरू किया जाएगा, जिससे पर्यावरण और उद्योग के बीच संतुलन साधने की कोशिश होगी।
वैश्विक राजनीति में भी हलचल
यह समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था की करीब 25 प्रतिशत GDP को कवर करता है, जिससे इसका अंतरराष्ट्रीय प्रभाव भी काफी बड़ा माना जा रहा है।
अमेरिका ने इस डील पर असंतोष जताते हुए बयान दिया कि “यूरोप अपने ही खिलाफ युद्ध फंड कर रहा है।”
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से भारत-EU व्यापार के साथ-साथ रणनीतिक और भू-राजनीतिक सहयोग भी नई ऊंचाई पर पहुंचेगा।



