नई दिल्ली।पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को पद छोड़ने के छह महीने बाद भी अब तक सरकारी आवास नहीं मिल पाया है। 21 जुलाई 2025 को अचानक इस्तीफा देने के बाद उन्होंने सितंबर में सरकारी बंगला खाली कर दिया था और फिलहाल दिल्ली के छतरपुर स्थित अपने निजी फार्महाउस में रह रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि कई बार आवेदन और आश्वासन के बावजूद उन्हें अब तक बंगला नंबर 34 आवंटित नहीं किया गया है।
बंगला मौजूद, लेकिन इस्तेमाल से दूर
एक निजी मीडिया संस्थान की टीम ने एपीजे अब्दुल कलाम रोड पर स्थित बंगला नंबर 34 का मौके पर जाकर निरीक्षण किया। वहां न तो किसी तरह का मरम्मत कार्य चल रहा था और न ही साफ-सफाई के कोई संकेत दिखे। तैनात गार्ड ने भी स्पष्ट किया कि फिलहाल यह बंगला किसी को आवंटित नहीं किया गया है।
मंत्रालय और अधिकारियों के बयान अलग-अलग
धनखड़ के करीबी सूत्रों का कहना है कि सितंबर में उन्हें बताया गया था कि बंगला अलॉट कर दिया गया है और इसकी मरम्मत में करीब तीन महीने का समय लगेगा। वहीं, हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स मंत्रालय के राज्य मंत्री तोखन साहू ने अलग बयान देते हुए कहा कि बंगला तभी आवंटित होगा, जब धनखड़ उसे स्वीकार करेंगे।
इस पूरे मामले में विभागीय अधिकारियों की ओर से अब तक कोई स्पष्ट और आधिकारिक स्थिति सामने नहीं आई है।
पूर्व उपराष्ट्रपतियों से तुलना
सूत्रों के अनुसार, पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू और हामिद अंसारी को रिटायरमेंट के तुरंत बाद सरकारी आवास उपलब्ध करा दिया गया था। नायडू को 20 अक्टूबर 2022 को बंगला मिला, जबकि हामिद अंसारी को महज 3-4 दिनों के भीतर आवास आवंटित कर दिया गया था। इसके उलट धनखड़ को अब तक इंतजार करना पड़ रहा है।
प्रोटोकॉल मिला, सुविधाएं नहीं लीं
निजी फार्महाउस में रहने के दौरान धनखड़ को सुरक्षा, गार्ड, सफाईकर्मी और गार्डनर जैसी प्रोटोकॉल सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, लेकिन उन्होंने सरकारी शेफ जैसी सुविधाएं नहीं लीं।
सवाल जस का तस
सरकारी बंगला खाली होने के बावजूद उसका आवंटन न होना, मंत्रालय और अधिकारियों के परस्पर विरोधी बयान और पूर्व उपराष्ट्रपति का निजी आवास में रहना—इन सबने इस पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर पूर्व उपराष्ट्रपति को उनका सरकारी आवास कब मिलेगा और संबंधित विभाग कब स्थिति स्पष्ट करेगा।



