रायपुर।अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की महासचिव एवं छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस की प्रभारी गुंजन सिंह के हालिया प्रदेश दौरे के दौरान आदिवासी महिला कांग्रेस की वरिष्ठ नेताओं से मुलाक़ात न हो पाने को लेकर संगठन के भीतर असंतोष उभर कर सामने आया है। आदिवासी पृष्ठभूमि से जुड़ी महिला नेताओं का कहना है कि उन्होंने पहले से समय माँगा था और मुलाक़ात की सूचना भी दी गई थी, इसके बावजूद प्रभारी से संवाद नहीं हो सका।
वरिष्ठ नेताओं का आरोप है कि वे प्रदेश में महिला कांग्रेस को मज़बूत करने के उद्देश्य से अपने क्षेत्रीय अनुभव, ज़मीनी समस्याएं और सुझाव प्रभारी तक पहुँचाना चाहती थीं। लेकिन लगातार बैठकों के टलने और अंततः मुलाक़ात न होने से वे स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रही हैं। उनका कहना है कि इससे आदिवासी महिलाओं की समस्याएं और आवाज़ संगठन के शीर्ष स्तर तक नहीं पहुँच पा रही हैं।
कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि प्रभारी का कार्यक्रम बेहद व्यस्त बताया गया, हालांकि अन्य संगठनों और नेताओं के साथ बैठकें आयोजित की गईं। इसके बावजूद आदिवासी महिला कांग्रेस की प्रतिनिधियों को इन बैठकों में शामिल नहीं किया गया, जिससे संगठनात्मक भेदभाव की भावना गहराई है।
नेताओं का कहना है कि वे विशेष रूप से आदिवासी महिलाओं से जुड़े अहम मुद्दों—जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा और राजनीतिक भागीदारी—पर चर्चा करना चाहती थीं। प्रभारी स्तर पर संवाद का अभाव संगठनात्मक समन्वय की कमी को दर्शाता है और इससे जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित होता है।
इस घटनाक्रम के बाद महिला कांग्रेस के भीतर यह बहस तेज़ हो गई है कि प्रदेश में लंबे समय से सक्रिय और जमीनी स्तर पर काम कर रहीं वरिष्ठ आदिवासी महिला नेताओं को निर्णय प्रक्रिया और नेतृत्व संवाद में समुचित स्थान मिलना चाहिए। नेताओं ने शीर्ष नेतृत्व से मांग की है कि भविष्य में ऐसे दौरों के दौरान सभी वर्गों और क्षेत्रों की महिला पदाधिकारियों को प्राथमिकता के साथ समय दिया जाए, ताकि संगठन में संतुलन बना रहे और असंतोष की स्थिति उत्पन्न न हो।
फिलहाल इस पूरे मामले पर महिला कांग्रेस प्रभारी गुंजन सिंह या प्रदेश महिला कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।







