अचल संपत्ति शुल्क में राहत की मांग तेज, चैंबर ऑफ कॉमर्स ने वित्त मंत्री से मिलकर रखीं व्यावहारिक बातें

Madhya Bharat Desk
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रायपुर। छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज का एक प्रतिनिधिमंडल आज राज्य के वित्त मंत्री ओपी चौधरी से मिला। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चैंबर के अध्यक्ष सतीश यारानी ने किया। मुलाकात का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में हाल ही में लागू की गई नई गाइडलाइन दरों और अचल संपत्ति के पंजीयन शुल्क से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना था।

बैठक के दौरान चैंबर ने वित्त मंत्री के सामने कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे। चैंबर का कहना था कि नई गाइडलाइन दरों से आवासीय उपभोक्ताओं, व्यापारियों, उद्योगपतियों और रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े सभी वर्गों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। प्रतिनिधियों ने जोर देकर कहा कि पंजीयन शुल्क, जमीन के मूल्यांकन और प्रक्रिया से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं।

चैंबर ने सुझाव दिया कि अचल संपत्ति मूल्यांकन और शुल्क निर्धारण की मौजूदा प्रक्रिया में संशोधन होना चाहिए, ताकि दरें व्यावहारिक हों और आम नागरिकों के लिए खरीद-फरोख्त की प्रक्रिया सरल बन सके। उनका कहना था कि नई गाइडलाइन दरों के कारण पंजीयन की लागत बढ़ रही है, जिससे बाजार में निवेश प्रभावित हो रहा है।

बैठक में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि यदि सरकार इन बदलावों पर विचार करे, तो राज्य में निवेश बढ़ेगा और व्यापारिक गतिविधियाँ अधिक सुगम होंगी। वित्त मंत्री ने सभी मुद्दों को ध्यानपूर्वक सुनते हुए आश्वासन दिया कि विभाग इस पर गंभीरता से विचार करेगा और आवश्यक कदम उठाएगा।

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