सूरजपुर जिले के प्रेमनगर क्षेत्र में भ्रष्टाचार की जड़ें एक बार फिर उजड़ती नज़र आईं, जब ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के एक एसडीओ को रिश्वत लेते हुए एसीबी की टीम ने रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। यह घटना न सिर्फ विभागीय प्रक्रियाओं की सच्चाई उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि अपनी मेहनत की कमाई पाने के लिए किसान किस तरह अफसरों के चक्कर काटने को मजबूर हो जाते हैं।
मामला ग्राम नवापारा खुर्द के एक किसान से जुड़ा है, जिसकी जमीन पर मछली पालन योजना के तहत तालाब निर्माण का कार्य करवाया गया था। भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ने के लिए तालाब का मूल्यांकन आवश्यक था, लेकिन विभागीय एसडीओ मूल्यांकन के नाम पर लगातार टालता रहा। किसान कई बार कार्यालय का चक्कर लगाता रहा, पर फाइल आगे नहीं बढ़ी। आखिरकार एक दिन एसडीओ ने साफ शब्दों में किसान से 15,000 रुपये की रिश्वत की मांग कर दी।
रिश्वत देने को तैयार न किसान, न झुकने वाला उसका आत्मसम्मान—इसलिए उसने सीधे एंटी करप्शन ब्यूरो में शिकायत दर्ज की। शिकायत की पुष्टि के बाद एसीबी ने पूरी रणनीति बनाई। तय योजना के अनुसार किसान रकम लेकर जैसे ही अपने घर पहुँचा, वहीं पहले से तैयार टीम ने निगरानी शुरू कर दी। शाम होते ही एसडीओ किसान के घर पहुंचा और जैसे ही उसने रिश्वत की रकम थामी, एसीबी की टीम ने उसे रंगे हाथ दबोच लिया।
गिरफ्तारी होते ही पूरे मामले का खुलासा हुआ—मूल्यांकन की प्रक्रिया के नाम पर महीनों से चल रहा खेल, किसान की मजबूरी और अफसर के भ्रष्ट इरादे। अब एसीबी न सिर्फ मामले की आगे जांच कर रही है, बल्कि एसडीओ की संपत्ति की भी जांच की तैयारी है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं।
यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर इस बात का सबूत है कि जागरूक नागरिक और मजबूत कानून मिलकर ही भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी लड़ाई लड़ सकते हैं। किसान की समझदारी और साहस ने एक भ्रष्ट अधिकारी को कानून के सामने लाकर खड़ा कर दिया।



