11 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर उबाल पर आ गई जब छत्तीसगढ़ जोहार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल के विवादित बयान के बाद प्रदेशभर में बवाल मच गया। अमित बघेल पर रायपुर के वीआईपी चौक पर “छत्तीसगढ़ महतारी” की मूर्ति से तोड़फोड़ करने और कई महापुरुषों — पंडित दीनदयाल उपाध्याय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, और अग्रेसन महाराज — पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप लगे हैं।
उनके कथित बयान में उन्होंने अग्रेसन महाराज के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया, जिससे देशभर में अग्रवाल और सिंधी समाज में भारी आक्रोश फैल गया। रायपुर, रायगढ़ और सरगुजा समेत कई जिलों में समाज के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए और पुलिस थानों में अमित बघेल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।
विवाद के तूल पकड़ते ही पुलिस ने अमित बघेल के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें फरार घोषित कर दिया और उन पर इनाम की घोषणा भी कर दी। इस बीच मामला राजनीतिक रंग लेने लगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला।
मीडिया से बातचीत में भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था चरमरा गई है और सरकार पूरी तरह विफल साबित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि कोई भी व्यक्ति किसी धर्म या महापुरुष के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करता है, तो यह पूरे छत्तीसगढ़ का अपमान है। उन्होंने कहा कि सरकार और उसके मंत्री इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकार अमित बघेल को बढ़ावा दे रही है।
भूपेश बघेल ने आगे कहा कि यदि भाजपा सरकार जाति और समाज में विभाजन करना चाहती है, तो यह प्रदेश के लिए खतरनाक संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि कानून व्यवस्था को ठीक ढंग से संचालित न कर पाने के कारण प्रदेश में असंतोष और अस्थिरता की स्थिति बन गई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। जहाँ एक ओर सामाजिक संगठन अमित बघेल की गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं, वहीं विपक्ष सरकार पर नरमी बरतने का आरोप लगा रहा है। इस मुद्दे ने न केवल प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है।



