नए साल के मौके पर प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सतरेंगा में पर्यटकों की बढ़ती भीड़ के बीच अवैध महुआ शराब की बिक्री से क्षेत्र का माहौल बिगड़ने लगा है। लगातार सामने आ रही अशांति की घटनाओं को देखते हुए अब गांव की महिलाओं ने खुद मोर्चा संभाल लिया है।
पर्यटन की शुरुआत के साथ ही सतरेंगा के ग्रामीणों ने क्षेत्र में नशाबंदी लागू कर रखी है, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग जंगल और पहाड़ी इलाकों में छिपकर अवैध रूप से महुआ शराब का निर्माण और बिक्री कर रहे थे। नए साल में पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ यह गतिविधि और तेज हो गई, जिससे गांव में मारपीट, गाली-गलौज और अव्यवस्था की शिकायतें सामने आने लगीं।
स्थिति को गंभीर मानते हुए सतरेंगा की महिला समिति ने गांव के प्रमुख लोगों के साथ मिलकर अवैध शराब के खिलाफ अभियान छेड़ दिया। महिलाएं हाथों में डंडे लेकर आसपास के जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में पहुंचीं। महिलाओं को आता देख शराब बनाने में जुटे लोग मौके से फरार हो गए।
इसके बाद महिला समिति ने जंगल में छिपाकर रखी गई शराब की भट्टियों को खोजकर नष्ट किया। तैयार की जा रही अवैध महुआ शराब को भी मौके पर ही खत्म कर दिया गया। इस कार्रवाई से गांव में अवैध शराब कारोबारियों में हड़कंप मच गया।
महिला समिति का कहना है कि सतरेंगा अब एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में उभर रहा है और यहां किसी भी तरह की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ग्रामीणों ने साफ किया है कि नशाबंदी का सख्ती से पालन कराया जाएगा और आगे भी अवैध शराब के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।
सतरेंगा निवासी गोमती बाई ने बताया कि क्षेत्र में रोजाना हजारों लोग पर्यटन के लिए पहुंच रहे हैं। अवैध महुआ शराब की वजह से माहौल खराब हो रहा है और मारपीट जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। इस संबंध में पहले भी शिकायत की जा चुकी है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते अब कलेक्टर से शिकायत की गई है।
वहीं गायत्री बाई ने चिंता जताते हुए कहा कि छोटे बच्चे भी शराब की लत का शिकार हो रहे हैं। बाहर से आने वाले पर्यटक भी यहां महुआ शराब खरीदकर पी रहे हैं, जिससे पूरे पर्यटन स्थल की छवि खराब हो रही है। महिलाओं ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
इस अभियान के बाद गांव में शांति व्यवस्था को लेकर सकारात्मक माहौल बना है और ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही अवैध शराब पर पूरी तरह अंकुश लगाएगा।



