छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में पंचायत स्तर पर कथित भ्रष्टाचार को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 8 पंचायत सचिवों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मामला 1.19 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध भुगतान से जुड़ा है, जिसने पूरे पंचायत विभाग में हलचल मचा दी है।
बताया जा रहा है कि यह गड़बड़ी 15वें वित्त आयोग के तहत मिली राशि के इस्तेमाल में सामने आई। आरोप है कि संबंधित सचिवों ने तय नियमों और प्रक्रियाओं को दरकिनार करते हुए विभिन्न वेंडरों को भुगतान कर दिया।
जांच के दौरान कई पंचायतों में अनियमितताएं उजागर हुईं। जिन पंचायतों के सचिवों पर कार्रवाई हुई है, उनमें तेन्दुमुढ़ा, नेवरी नवापारा, ठाड़पथरा, आमाडोब, पूटा, आमगांव, साल्हेघोरी और हर्राटोला शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कई मामलों में बिना स्वीकृति के और नियमों के खिलाफ जाकर भुगतान किए गए। शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने तुरंत जांच शुरू की और दोषी पाए जाने पर यह कड़ा कदम उठाया।
जिला पंचायत CEO ने साफ संदेश दिया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले समय में अन्य पंचायतों के वित्तीय लेन-देन की भी गहन समीक्षा की जाएगी।
इस कार्रवाई के बाद पंचायत विभाग में अफसरों और कर्मचारियों के बीच बेचैनी बढ़ गई है और अब हर कोई अपने कामकाज को लेकर सतर्क नजर आ रहा है।







