कांग्रेस में जिला अध्यक्षों की सूची से पहले बढ़ा बवाल: पूर्व विधायक ने लगाया रिश्वतखोरी का आरोप, पार्टी ने बताया निराधार

Madhya Bharat Desk
3 Min Read

रायपुर | छत्तीसगढ़ कांग्रेस में जिला अध्यक्षों की नई सूची आने से पहले ही सियासत गर्मा गई है। पार्टी से निष्कासित पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह ने कांग्रेस की सह प्रभारी जरिता लैटफ्लांग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जिला अध्यक्ष बनाए जाने के नाम पर दावेदारों से 5 से 7 लाख रुपए तक की रिश्वत मांगी जा रही है।

बृहस्पति सिंह ने दावा किया कि बलरामपुर, बैकुंठपुर, अंबिकापुर, सूरजपुर और जशपुर जैसे जिलों के कई दावेदारों को फोन कॉल कर पैसे की मांग की जा रही है। उनका कहना है कि फोन पर खुद को “कांग्रेस सह प्रभारी जरिता मैडम” बताने वाले व्यक्ति से बात कराई जाती है, और फिर पद दिलाने के नाम पर रकम मांगी जाती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस में पहले भी प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा के समय विधायकों और उम्मीदवारों से इसी तरह पैसे वसूले गए थे। सिंह ने कहा कि “अगर इसी तरह 5-7 लाख की रिश्वत लेकर नियुक्तियां होंगी, तो कांग्रेस का संगठन कैसे मजबूत होगा?”

बृहस्पति सिंह ने कांग्रेस हाईकमान से इस पूरे प्रकरण की जांच की मांग करते हुए कुमारी शैलजा और जरिता लैटफ्लांग को पद से हटाने की अपील की। उनका कहना है कि पार्टी की यह कार्यप्रणाली संगठन की साख को नुकसान पहुंचा रही है।

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि बृहस्पति सिंह के आरोप “निराधार, मिथ्या और बेबुनियाद” हैं। वे पार्टी से निष्कासित हैं और कांग्रेस में दोबारा आने की कोशिश कर रहे थे, पर उनके आवेदन पर कोई विचार नहीं हुआ।

पार्टी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस हाईकमान ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी जिलों में ब्लॉक स्तर से राय लेकर जिला अध्यक्षों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की है, ताकि समर्पित कार्यकर्ताओं को मौका मिल सके।

इस विवाद ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अंदरूनी मतभेदों और गुटबाजी को उजागर कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि हाईकमान इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है — क्या कार्रवाई होती है या मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment