छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर हलचल मच गई है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ आदिवासी नेता और राज्य के पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कोरबा कलेक्टर अजीत वसंत को हटाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री निवास के सामने धरने पर बैठने का ऐलान कर दिया है।
ननकीराम कंवर ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर तीन दिन के भीतर कोरबा कलेक्टर को हटाने की मांग की थी। इस पत्र में उन्होंने कुल 14 बिंदुओं पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कलेक्टर अजीत वसंत को “हिटलर” तक कह दिया था। कंवर का आरोप है कि कलेक्टर के कार्यकाल में भ्रष्टाचार, मनमानी और प्रशासनिक अनियमितताएं बढ़ गई हैं।
तीन दिन का अल्टीमेटम खत्म होने के बावजूद जब सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो ननकीराम कंवर ने दूसरा पत्र जारी करते हुए मुख्यमंत्री निवास के सामने धरना देने का ऐलान कर दिया। उन्होंने रायपुर कलेक्टर को पत्र लिखकर धरने की जानकारी भी दे दी है।
ननकीराम कंवर ने अपने पत्र में दावा किया है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान उन्होंने कई घोटालों का खुलासा किया था — जिनमें शराब, कोयला, सीजीएमएससी में दवा खरीद और पीएससी भर्ती घोटाले शामिल हैं। इन मामलों में कुछ अफसरों और नेताओं की गिरफ्तारी भी हुई, लेकिन कोरबा कलेक्टर के खिलाफ दर्ज शिकायतों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
कंवर का कहना है कि मुख्यमंत्री के संज्ञान में मामला लाने के बावजूद अधिकारीगण मामले को दबा रहे हैं और जनता को गुमराह कर रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार जानबूझकर दोषियों को संरक्षण दे रही है। इस कारण अब वे मजबूर होकर धरना देने जा रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में ननकीराम कंवर के इस कदम को सरकार के लिए नई चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कंवर की नाराजगी को शांत करने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन अब मामला सार्वजनिक रूप से सरकार के खिलाफ मुखर विरोध में बदल चुका है।



