रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना ‘जल जीवन मिशन (JJM)’ एक बार फिर छत्तीसगढ़ में बड़े भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण सुर्खियों में है।
एक आरटीआई एक्टिविस्ट मनोज गुप्ता द्वारा राज्यपाल को भेजे गए पत्र ने पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल मचा दी है।
पत्र में JJM के दो शीर्ष अधिकारियों पर ₹4500 करोड़ के आवंटन में 4% तक की ‘कमीशन वसूली’ का गंभीर आरोप लगाया गया है, जिससे अनुमानतः ₹160 करोड़ से अधिक की अवैध वसूली हुई है।
मुख्य आरोप: “डंके की चोट पर वसूली”
शिकायत में नामजद दो अधिकारी —
एस. एन. पांडे, अतिरिक्त मिशन संचालक, जल जीवन मिशन संजय बृजपुरिया, अधीक्षण अभियंता, दुर्ग (तथा मंत्री के OSD) पर आरोप है कि ये दोनों अधिकारी राज्य स्तर से जारी सभी आवंटनों में ठेकेदारों और फील्ड इंजीनियरों से 4% तक कमीशन वसूलते हैं।
मार्च 2025 तक ₹4500 करोड़ के आवंटन में इस दर से वसूली का अनुमान लगभग ₹160 करोड़ तक पहुंचता है।


दोहरी भूमिका और ‘टंकी घोटाला’
आरटीआई शिकायत में अधीक्षण अभियंता संजय बृजपुरिया पर कई गंभीर आरोप दर्ज किए गए हैं—
- दोहरी नियुक्ति: दुर्ग में SE पद पर रहते हुए वे एक मंत्री के OSD भी हैं। आरोप है कि यह पद केवल “वसूली नेटवर्क” को बनाए रखने के लिए रखा गया है।
- जिंक एल्युमिनियम टंकी घोटाला: बृजपुरिया पर आरोप है कि उन्होंने दुर्ग संभाग में गैर-मानक जिंक एल्युमिनियम टंकी बनवाने का ठेका अपने करीबी ठेकेदारों को दिलवाया।
जबकि प्रदेश के किसी अन्य जिले में ऐसी टंकी नहीं बनाई जा रही है। - पूर्व निलंबन: शिकायत में उल्लेख है कि बृजपुरिया को बिलासपुर नगर निगम में भ्रष्टाचार के आरोप में पूर्व में निलंबित किया जा चुका है।
- उदाहरण: मोहला जिले की एक योजना में ₹106 करोड़ के आवंटन पर ₹4.24 करोड़ की कमीशन वसूली की शिकायत सामने आई है।
ED और हाई कोर्ट की नजर में मिशन
यह खुलासा ऐसे समय हुआ है जब जल जीवन मिशन की अनियमितताओं को लेकर ED और बिलासपुर हाई कोर्ट पहले से जांच कर रहे हैं।
- सरकारी कार्रवाई: सरकार पहले ही 6 कार्यपालन अभियंताओं को निलंबित कर चुकी है।
- हाई कोर्ट की सख्ती: अदालत ने मिशन में गड़बड़ियों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव से शपथपत्र सहित जवाब मांगा है।
बताया गया है कि ₹11,000 करोड़ से अधिक की राशि खर्च होने के बावजूद कई जिलों में जल आपूर्ति की स्थिति बेहद खराब है।
राज्यपाल और CM को भेजी शिकायत
आरटीआई एक्टिविस्ट मनोज गुप्ता ने यह शिकायत राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भेजी है।
उन्होंने मांग की है कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि मिशन को “कमीशन-मुक्त” किया जा सके।
जनता की उम्मीदों पर ‘कमीशन का ग्रहण’
‘हर घर नल से जल’ का सपना लेकर शुरू हुआ जल जीवन मिशन अब कमीशनखोरी और ठेकेदारी तंत्र के जाल में उलझता दिख रहा है।
अगर आरोप सही पाए गए, तो यह छत्तीसगढ़ में अब तक का सबसे बड़ा जल-संबंधी भ्रष्टाचार कांड साबित हो सकता है।







