भारत का स्वदेशी खेल रोलबॉल (Rollball) अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी जगह बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मांग उठ रही है कि इस रोमांचक भारतीय खेल को 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स (राष्ट्रमंडल खेलों) में शामिल किया जाए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खेलों को प्रोत्साहन देने की जो मुहिम देशभर में शुरू हुई है, उसका परिणाम यह है कि भारत अब विश्व खेल मंच पर मजबूती से अपनी पहचान बना रहा है। भारतीय ओलंपिक संघ, केंद्रीय खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण के सहयोग से अब भारत के युवा नए खेलों में भी सफलता की नई कहानियाँ लिख रहे हैं।
भारत की खोज — रोलबॉल
पुणे के खेल प्रेमी राजे दाभाडे ने वर्ष 2003 में इस अनोखे खेल रोलबॉल का आविष्कार किया। महज दो दशक में यह खेल 60 से अधिक देशों में लोकप्रिय हो गया है। रोलर स्केट्स पर खेले जाने वाले इस खेल में 20-20 मिनट के दो हाफ होते हैं, जिनमें खिलाड़ियों की गति और संतुलन दर्शकों को रोमांचित कर देते हैं।
वरिष्ठ खेल पत्रकार जसवंत कुमार क्लाडियस का कहना है कि “रोलबॉल भारत की ऐसी खोज है, जिसने कम समय में वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है। अब जरूरत है कि सरकार और खेल संगठनों के सहयोग से इसे 2030 राष्ट्रमंडल खेलों में प्रदर्शन खेल के रूप में स्थान दिलाया जाए।”
राष्ट्रीय से अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक रोलबॉल का सफर
अब तक सीनियर, जूनियर, पुरुष, महिला और युवा वर्गों में करीब 13 विश्व प्रतियोगिताएं आयोजित की जा चुकी हैं। भारत में हर वर्ष सब-जूनियर से लेकर सीनियर वर्ग तक की राष्ट्रीय स्पर्धाएं होती हैं। 2023 के गोवा राष्ट्रीय खेलों में रोलबॉल को शामिल किया जाना इस खेल के बढ़ते प्रभाव का प्रमाण है।

भारत की पहल और अंतर्राष्ट्रीय पहचान
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की भूमिका मजबूत हो रही है। हाल ही में भारत के डॉ. सेंथिल के नाथन को इंटरनेशनल रोलबॉल फेडरेशन (IRBF) का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है। अप्रैल 2024 में इंग्लैंड में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत ने रोलबॉल को ओलंपिक स्पोर्ट में शामिल करने का प्रस्ताव रखा।
2030 राष्ट्रमंडल खेलों में रोलबॉल की उम्मीदें
अब यह मांग जोर पकड़ रही है कि 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स में रोलबॉल को डेमोंस्ट्रेशन स्पोर्ट के रूप में जगह दी जाए। इस दिशा में रोलबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया और खेल मंत्रालय सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
जसवंत कुमार क्लाडियस ने कहा कि “अगर भारत इस दिशा में ठोस पहल करता है, तो 2047 तक खेलों में विश्व मंच पर भारत की स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी। रोलबॉल भारत की युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरक उदाहरण बन सकता है।”







