छत्तीसगढ़ में एक बार फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। राज्य के चार जिलों — रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव और धमतरी (कुर्रूद) — में एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) और ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) की संयुक्त टीमों ने बुधवार सुबह एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित रूप से जिला खनिज निधि (DMF) से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले के मामलों से संबंधित है।
इन छापों के तहत कुल 12 ठिकानों पर दबिश दी गई, जिनमें अधिकांश ठेकेदारों और व्यापारियों के घर और दफ्तर शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने DMF फंड के माध्यम से संचालित विकास कार्यों में भारी वित्तीय अनियमितताएं कीं। लम्बे समय से इन परियोजनाओं में गड़बड़ियों और फर्जी बिलिंग की शिकायतें मिल रही थीं, जिनके आधार पर यह संयुक्त छापामार कार्रवाई की गई।
टीमों ने मौके पर पहुंचकर महत्वपूर्ण दस्तावेजों, रिकॉर्ड्स और डिजिटल डेटा की जांच शुरू कर दी है। कुछ स्थानों से फाइलें, ठेके से संबंधित रसीदें और अन्य वित्तीय दस्तावेज जब्त किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, जांच अभी जारी है और पूरे दिन चलने की संभावना है।
सूत्रों का कहना है कि यह घोटाला करोड़ों रुपये के दुरुपयोग से जुड़ा हो सकता है और इसमें कई बड़े नाम सामने आने की संभावना है। जांच एजेंसियों ने फिलहाल आधिकारिक रूप से किसी का नाम उजागर नहीं किया है, लेकिन प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया है।
यह मामला न केवल वित्तीय अनियमितताओं का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सार्वजनिक निधियों के दुरुपयोग पर सरकार की निगरानी और कार्रवाई कितनी सख्त हो चुकी है। आने वाले दिनों में इस छापेमारी से जुड़े बड़े खुलासे होने की उम्मीद है, जो राज्य की खनिज निधि के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नए सवाल खड़े कर सकते हैं।







