एनएसयूआई ने राज्य गीत अरपा पैरी के धार को सरकारी कार्यक्रमों में अनिवार्य करने की मांग, मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

Madhya Bharat Desk
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छत्तीसगढ़ एनएसयूआई ने राज्य गीत ‘अरपा पैरी के धार’ को प्रदेश के सभी सरकारी और सार्वजनिक स्थलों पर बजाने की मांग की है। इस संबंध में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा।

मंगलवार को एनएसयूआई के प्रभारी महामंत्री हेमंत पाल के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कलेक्टोरेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा के समक्ष नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। संगठन का कहना है कि राज्य गीत को सम्मानपूर्वक हर सरकारी कार्यक्रम, शैक्षणिक संस्थान और सार्वजनिक स्थल पर बजाया जाना चाहिए।

एनएसयूआई ने राज्य स्थापना दिवस पर विशेष मांग रखी
ज्ञापन में कहा गया है कि आगामी 1 नवंबर, जब छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस मनाएगा और अपने 25 वर्ष पूरे करेगा, उस दिन और आगे भी ‘अरपा पैरी के धार’ को राज्य की अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव के प्रतीक के रूप में हर जगह अनिवार्य रूप से बजाया जाए।

हेमंत पाल बोले — ‘यह गीत हमारी आत्मा और पहचान है’
एनएसयूआई महामंत्री हेमंत पाल ने कहा, “राज्य गीत ‘अरपा पैरी के धार’ सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की आत्मा और पहचान है। इसे हर नागरिक से जोड़ने की जरूरत है ताकि नई पीढ़ी में प्रदेश के प्रति गर्व और सांस्कृतिक चेतना का भाव जागृत हो सके।”

सरकार ने मांग नहीं मानी तो होगा आंदोलन
हेमंत पाल ने चेतावनी दी कि अगर सरकार इस मांग पर शीघ्र निर्णय नहीं लेती है, तो एनएसयूआई कार्यकर्ता रायपुर रेलवे स्टेशन परिसर में रिक्शा चलाकर और लाउडस्पीकर पर राज्य गीत बजाकर आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि यह कदम किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, अस्मिता और स्वाभिमान के लिए है।

इन कार्यकर्ताओं की रही उपस्थिति
इस दौरान प्रदेश सचिव मोनू तिवारी, जिला महासचिव गावेश साहू, वाइस चेयरमैन पुनेश्वर लहरें, विधानसभा उपाध्यक्ष अंकित बंजारे, असलान शेख, शुभ, अमित शर्मा, साहिल खान समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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