भोपाल: दिवाली के बाद मध्यप्रदेश में देशी पटाखा गन से हुई दुर्घटनाओं के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। अकेले भोपाल में 150 से ज्यादा लोगों की आंखें झुलसने या घायल होने के मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं पूरे प्रदेश में अब तक 188 से अधिक मरीजों का इलाज जारी है।
इनमें से ज्यादातर घटनाएं 7 से 14 साल के बच्चों के बीच हुई हैं, जो खेल-खेल में देशी पटाखा गन फोड़ रहे थे। ग्वालियर में 19 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि भोपाल की स्थिति सबसे गंभीर बताई जा रही है।
भोपाल जीएमसी (गांधी मेडिकल कॉलेज) के नेत्र विभाग में 36 मरीजों का इलाज चल रहा है, जिनमें से अब तक 15 मरीजों की सर्जरी की जा चुकी है। डॉक्टरों के मुताबिक, कई मरीजों की आंखों में गहरी चोटें आई हैं।
डॉक्टरों ने बताया कि दो बच्चों की आंखों में एमनियोटिक मेम्ब्रेन (झिल्ली) लगाई गई है — यह वही झिल्ली होती है जो प्रसव के दौरान गर्भ से निकलती है, और आंख की सतह को सुरक्षित रखने तथा ठीक करने में मदद करती है।
विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि देशी या असुरक्षित पटाखों का इस्तेमाल बिल्कुल न करें, खासकर बच्चों को इनसे दूर रखें, क्योंकि इससे स्थायी नेत्र क्षति हो सकती है।







