गढ़चिरौली (महाराष्ट्र):आजादी के बाद पहली बार महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली जिले के एक सुदूर गांव में दीपों की जगमग रोशनी फैली। दशकों तक लाल आतंक की छाया में डूबे इस क्षेत्र में इस बार लोगों ने सुरक्षा बलों के साथ दीपावली का त्योहार हर्षोल्लास से मनाया।
गढ़चिरौली के इस गांव में पहली बार भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवानों ने ग्रामीणों के साथ दीप जलाकर और मिठाइयाँ बाँटकर एक ऐतिहासिक संदेश दिया — “जहाँ पहले बंदूक की गूंज थी, अब वहां दीपों की रोशनी है।”
लाल आतंक से दीपों की जगमगाहट तक का सफर
कभी भय और नक्सली हिंसा का गढ़ माने जाने वाले इस इलाके में अब सुरक्षा और विश्वास की नई किरण जग चुकी है। गांव के बुजुर्गों ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार इतनी शांति और खुशी के साथ दीपावली मनाई है। बच्चे सैनिकों के साथ दीप जलाते और खेलते नजर आए।
ITBP जवानों की पहल ने जीता दिल
ITBP जवानों ने गांव के लोगों के साथ दीप जलाकर उन्हें मिठाइयाँ बांटीं और संदेश दिया कि अब यह क्षेत्र विकास और अमन की राह पर है। जवानों ने ग्रामीणों से कहा कि “यह रोशनी सिर्फ दीपों की नहीं, बल्कि उम्मीद और नए भविष्य की है।”
स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों की संयुक्त कोशिशों से गढ़चिरौली अब बदल रहा है।
जहाँ कभी नक्सलियों का डर था, वहीं अब बच्चे पढ़ाई के सपने देख रहे हैं। यह दीपावली उस बदलाव की गवाह बनी है, जो शांति और विकास की दिशा में एक नई शुरुआत का प्रतीक है।



