बिहार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के स्टार प्रचारकों की सूची जारी हो गई है, लेकिन छत्तीसगढ़ से एक भी नेता को इस सूची में जगह नहीं मिली है।
यह चौंकाने वाला फैसला भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की राज्य के संगठन और सत्ता से दूरी और अविश्वास को उजागर करता है।
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व ने छत्तीसगढ़ के किसी मंत्री, सांसद या संगठन पदाधिकारी को बिहार में “स्टार प्रचारक” के योग्य नहीं माना है।
इससे साफ संकेत मिलता है कि राज्य के नेतृत्व पर पार्टी का भरोसा कमजोर पड़ा है।


मीडिया में बयान, पर हकीकत कुछ और
छत्तीसगढ़ भाजपा के कुछ नेताओं ने हाल ही में मीडिया में यह दावा किया था कि उन्हें बिहार चुनाव में “महत्वपूर्ण जिम्मेदारी” दी गई है।
लेकिन अब सामने आई सूची से स्पष्ट हो गया है कि वे प्रचार की प्रमुख श्रेणी में शामिल नहीं हैं, बल्कि केवल औपचारिक या संगठनात्मक भूमिका में हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह स्थिति भाजपा के लिए गंभीर संकेत है — क्योंकि जब कांग्रेस शासनकाल में छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय उपस्थिति रखता था, तब आज भाजपा की सत्ता में रहते हुए भी राज्य के नेता केंद्रीय मंच से गायब हैं।

संघ रिपोर्ट का असर?
भाजपा और संघ से जुड़े सूत्रों के अनुसार, हाल ही में संघ (RSS) की एक रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को भेजी गई थी, जिसमें छत्तीसगढ़ सरकार में भ्रष्टाचार और नौकरशाही के हावी होने की बात कही गई थी।
कहा जा रहा है कि इस रिपोर्ट ने हाईकमान को राज्य के कुछ नेताओं से दूरी बनाने पर मजबूर किया।
राजनीतिक संदेश साफ
यह निर्णय न केवल बिहार चुनाव रणनीति का हिस्सा है, बल्कि छत्तीसगढ़ भाजपा के लिए स्पष्ट राजनीतिक संदेश भी है —
कि संगठन और सरकार के बीच की खाई को पाटे बिना राज्य का नेतृत्व राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान नहीं बना सकेगा।
बिहार चुनाव की स्टार प्रचारक सूची ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व फिलहाल छत्तीसगढ़ के नेताओं को राष्ट्रीय स्तर का चेहरा नहीं मानता।
राज्य के लिए यह स्थिति न केवल गौरव का अभाव है, बल्कि आने वाले दिनों में राजनीतिक पुनर्संतुलन की भूमिका भी तय कर सकती है।







