बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, रोहतास जिले की राजनीति में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं। एनडीए के सीट बंटवारे के बाद जदयू को बड़ा झटका लगा है। कई वरिष्ठ नेताओं ने टिकट कटने से नाराज होकर पार्टी छोड़ दी है और अब बीएसपी व जन सुराज जैसी पार्टियों में शामिल हो रहे हैं। इससे जिले की कई सीटों पर चौतरफा मुकाबले के आसार बन गए हैं।
जदयू में मचा बवाल, कई नेताओं ने थामा बीएसपी का दामन
एनडीए में सीटों के बंटवारे के बाद जदयू के कई नेता नाराज हैं। दिनारा और सासाराम सीटें उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएम के खाते में जाने से असंतोष बढ़ गया है। दिनारा से टिकट की दावेदारी कर रहे पूर्व मंत्री जयकुमार सिंह ने जदयू छोड़कर बीएसपी का दामन थाम लिया है। वे बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।
सासाराम सीट पर बदले समीकरण, बीएसपी ने उतारा नया उम्मीदवार
सासाराम सीट से पूर्व विधायक डॉ. अशोक सिंह कुशवाहा ने भी आरएलएम को मिली सीट से नाराज होकर जदयू से इस्तीफा दे दिया। बीएसपी ने उन्हें अपना प्रत्याशी घोषित किया है। चूंकि सासाराम क्षेत्र कुशवाहा समाज का गढ़ माना जाता है, इसलिए अशोक कुशवाहा के बीएसपी में जाने से यहां मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।
जन सुराज की बढ़ती ताकत से जदयू में बढ़ी बेचैनी
जदयू के जिला अध्यक्ष अजय सिंह कुशवाहा ने भी इस्तीफा देकर जन सुराज का दामन थाम लिया है। उनके भाई डॉ. निर्मल कुशवाहा के भी जन सुराज के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरने की संभावना है। बताया जा रहा है कि और भी कई जदयू नेता जल्द ही पार्टी छोड़ सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
विश्लेषकों के मुताबिक, जन सुराज के बढ़ते जनसमर्थन और एनडीए बागियों के नए गठबंधन में शामिल होने से रोहतास जिले में कई सीटों पर अप्रत्याशित नतीजे सामने आ सकते हैं। बीएसपी, जन सुराज और निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी से इस बार मुकाबला बहुकोणीय होने की संभावना है।
नए राजनीतिक समीकरणों से बढ़ी हलचल
एनडीए के भीतर मचे असंतोष और जन सुराज के बढ़ते प्रभाव से रोहतास समेत पूरे बिहार में सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। अब सबकी निगाहें उम्मीदवारों की औपचारिक घोषणा पर टिकी हैं, जिसके बाद चुनावी मैदान का स्वरूप और भी स्पष्ट होगा।







