बिहार चुनाव 2025: एनडीए में सीट बंटवारे पर सहमति के बाद भी फंसा पेच, जेडीयू-लोजपा में टकराव जारी

Madhya Bharat Desk
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पटना।बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में सीट बंटवारे की सहमति तो बन गई है, लेकिन अब विधानसभा क्षेत्रों के चयन पर विवाद गहराने लगा है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने बड़ी मुश्किल से जेडीयू के अलावा अपने तीन सहयोगी दलों — लोजपा (रामविलास), हम और आरएलएम — को सीटों की संख्या पर राजी किया है। हालांकि, अब इन दलों के बीच यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि कौन-सा दल किन सीटों पर चुनाव लड़ेगा।

रविवार को एनडीए ने सीट बंटवारे के फॉर्मूले पर सहमति बनने की घोषणा की थी और सोमवार को संयुक्त प्रेस वार्ता के जरिए इसे औपचारिक रूप से घोषित करने की योजना थी। लेकिन विधानसभा क्षेत्रों के बंटवारे पर सहमति न बनने के कारण प्रेस वार्ता को स्थगित करना पड़ा।

जेडीयू और लोजपा में सीटों को लेकर खींचतान
सूत्रों के मुताबिक, लोजपा को दस, हम को एक और आरएलएम को दो ऐसी सीटें देने की बात है जिन पर पिछली बार जेडीयू ने चुनाव लड़ा था। जेडीयू कदवा, सिमरी बख्तियारपुर, बरारी और साहेबपुर कमाल जैसी सीटें छोड़ने को तैयार नहीं है, जबकि लोजपा इन क्षेत्रों पर अपनी दावेदारी छोड़ना नहीं चाहती।

भाजपा कर रही है मध्यस्थता की कोशिश
भाजपा की ओर से उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल इस विवाद को सुलझाने की कोशिश में जुटे हैं। दोनों नेताओं ने जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा से बातचीत की है। पार्टी रणनीतिकारों का कहना है कि जेडीयू से समझौते के बाद भाजपा को अपने अन्य सहयोगियों से फिर चर्चा करनी होगी।

कुशवाहा और मांझी की नाराजगी खुलकर सामने
आरएलएम प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा और हम पार्टी नेता जीतन राम मांझी सीटों के बंटवारे से खासे नाराज हैं। कुशवाहा ने सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं से माफी मांगते हुए लिखा, “आज बादलों ने फिर साजिश की, जहां मेरा घर था वहीं बारिश की।” वहीं, मांझी ने कहा कि उम्मीदों से कम सीटें मिलने के कारण कार्यकर्ताओं में निराशा है, जिससे एनडीए को नुकसान हो सकता है।

संभावना: जेडीयू उम्मीदवार लड़ सकते हैं लोजपा के टिकट पर
सूत्रों के अनुसार, विवाद सुलझाने के लिए एनडीए एक नए फॉर्मूले पर विचार कर रहा है। इसके तहत जेडीयू के कुछ उम्मीदवारों को लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने का अवसर दिया जा सकता है। इससे गठबंधन की एकता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

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