चैटजीपीटी पर जल्द होगी शॉपिंग और यूपीआई पेमेंट की सुविधा, ओपनएआई ने भारत में पायलट शुरू किया

Madhya Bharat Desk
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ओपनएआई ने एनपीसीआई और रेजरपे के साथ मिलकर चैटजीपीटी में यूपीआई पेमेंट और शॉपिंग फीचर का पायलट शुरू कर दिया है। इस नई पहल के तहत यूजर्स चैट करते हुए सीधे खरीदारी और पेमेंट कर सकेंगे। यानी चैट के दौरान ही बिगबास्केट जैसी वेबसाइट से ऑर्डर देना संभव होगा।

भारत में चैटजीपीटी यूपीआई पायलट प्रोग्राम:
ओपनएआई ने भारत में इस नई सुविधा की टेस्टिंग शुरू कर दी है। कंपनी का कहना है कि यह पायलट यह जांचने के लिए है कि एआई एजेंट सुरक्षित, पारदर्शी और यूजर-कंट्रोल्ड तरीके से वित्तीय लेनदेन कर सकता है या नहीं। चैटजीपीटी को यूपीआई नेटवर्क से जोड़कर यूजर्स को चैट के अंदर ही ट्रांजैक्शन की सुविधा दी जाएगी।

बिगबास्केट बना पहला पार्टनर:
टाटा ग्रुप की ई-कॉमर्स कंपनी बिगबास्केट इस फीचर को अपनाने वाला पहला प्लेटफॉर्म है। एक्सिस बैंक और एयरटेल पेमेंट्स बैंक इस पायलट में बैंकिंग पार्टनर के रूप में शामिल हैं। ओपनएआई के इंटरनेशनल स्ट्रैटेजी डायरेक्टर ओलिवर जे ने कहा, “एनपीसीआई के साथ काम करना गर्व की बात है। हमारा उद्देश्य एआई और यूपीआई को मिलाकर सुरक्षित, आसान और इंटरएक्टिव पेमेंट अनुभव देना है।”

यूपीआई: ग्लोबल टेक इनोवेशन:
भारत का यूपीआई हर महीने 20 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन संभालता है और यह दुनिया के भरोसेमंद डिजिटल पेमेंट नेटवर्क में शामिल है। ओपनएआई और एनपीसीआई का यह सहयोग दर्शाता है कि भारत की फिनटेक तकनीक अब वैश्विक एआई प्लेटफॉर्म्स का हिस्सा बन रही है।

एनपीसीआई की नई तकनीकी घोषणाएं:

  • एआई-बेस्ड यूपीआई हेल्प: स्मार्ट चैट टूल, जो पेमेंट और डिस्प्यूट सॉल्विंग में मदद करेगा।
  • आईओटी पेमेंट्स via यूपीआई: कार, स्मार्ट टीवी और वियरेबल्स से सीधे पेमेंट संभव।
  • यूपीआई रिजर्व पे: यूजर किसी खास ट्रांजैक्शन के लिए क्रेडिट लिमिट ब्लॉक और मैनेज कर सकेंगे।

ये सभी फिलहाल पायलट स्टेज में हैं और जल्द ही पब्लिक रोलआउट की संभावना है।

संभावित खतरे और चुनौतियां:

  1. डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा: यूजर डेटा लीक या साइबर अटैक का जोखिम।
  2. फिशिंग और ऑनलाइन फ्रॉड: नकली चैट और फेक लिंक से धोखाधड़ी।
  3. एआई ऑटोनॉमस एरर: गलत आदेश पर अनचाहे पेमेंट या ऑर्डर।
  4. बिना सोच-समझे पेमेंट: यूजर्स जल्दी ‘ओके’ दबाकर फंड मिसयूज कर सकते हैं।
  5. टेक्निकल फेलियर: सर्वर डाउन या यूपीआई नेटवर्क रुकावट से ट्रांजैक्शन फेल।
  6. कानूनी और रेगुलेटरी चुनौतियां: एआई पेमेंट के लिए स्पष्ट गाइडलाइन अभी नहीं।
  7. एआई बायस: सीमित या पक्षपाती शॉपिंग विकल्प दिखाने का खतरा।

एनपीसीआई, रेजरपे और ओपनएआई मिलकर सुरक्षा, उपयोग में आसानी और सिस्टम स्टेबिलिटी का परीक्षण कर रहे हैं। अगर पायलट सफल रहता है तो जल्द ही चैटजीपीटी एक इंटरएक्टिव शॉपिंग असिस्टेंट के रूप में सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध होगा।

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