हर शहर को सुरक्षित और समावेशी बनाएं : माननीय राज्य मंत्री
आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने 8 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में ‘संकट के शहरी समाधान’ विषय पर विश्व पर्यावास दिवस 2025 मनाया। इस विषय पर ध्यान केंद्रित किया गया कि कैसे शहर लचीले, समावेशी और टिकाऊ बनने के लिए बेहतर तैयारी कर सकते हैं और साथ ही जलवायु परिवर्तन, प्रवासन और शहरीकरण जैसी चुनौतियों का सामना भी कर सकते हैं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू थे। आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव श्री श्रीनिवास कटिकिथला, मंत्रालय में अपर सचिव श्री सतिंदर पाल सिंह, सभी के लिए आवास/आवास प्रभाग के संयुक्त सचिव एवं मिशन निदेशक श्री कुलदीप नारायण, संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर, यूएन- इंडिया श्री शोम्बी शार्प, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और स्वायत्त संगठनों के सीएमडी भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, हुडको, एनएचबी आदि ने भी भाग लिया।

मुख्य भाषण देते हुए, माननीय राज्य मंत्री ने सतत शहरीकरण और देश की विकास यात्रा से इसके जुड़ाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हर शहर को सम्मानजनक और लोगों के लिए अवसर-योग्य बनाने के प्रयास किए जाने चाहिए। माननीय राज्य मंत्री ने आगे कहा कि विश्व पर्यावास दिवस 2025 का विषय केवल एक कैलेंडर वर्ष नहीं है, बल्कि ऐसे शहरों के निर्माण के लिए भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता की पुष्टि करना है जो लचीले, समावेशी, टिकाऊ हों और साथ ही संकट का सामना करने और मज़बूती से उभरने के लिए तैयार हों। उन्होंने स्पष्ट रूप से शहरों को सुरक्षित, लचीले, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में काम करने पर ज़ोर दिया।
माननीय राज्य मंत्री ने कहा, “यदि हम लचीलेपन में समझदारी से निवेश करते हैं, स्थानीय सरकारों को सशक्त बनाते हैं और सार्वजनिक-निजी-जन भागीदारी की क्षमता का दोहन करते हैं, तो हमारे शहर न केवल संकट का सामना करने में सक्षम होंगे, बल्कि विकास के शक्तिशाली इंजन के रूप में भी उभरेंगे।”

आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव ने कहा कि शहरी संकट के प्रति नीतिगत प्रतिक्रिया में शहरों के बुनियादी ढांचे, सामाजिक प्रणालियों और अर्थव्यवस्थाओं को अधिक लचीला और अनुकूलनीय बनाकर उन्हें मजबूत बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यद्यपि शहरों के सामने कई चुनौतियाँ हैं, फिर भी वे परिवर्तनकारी कार्रवाई के अनूठे अवसर भी प्रदान करते हैं, जिससे विकास और लचीलेपन का एक सकारात्मक चक्र बनता है।
सचिव ने कहा, “भारत का दृष्टिकोण इन चुनौतियों को भविष्य के विकास और समृद्धि की नींव में बदलने के स्पष्ट दृष्टिकोण से निर्देशित है।”

पीएमएवाई-शहरी, अमृत, पीएम स्वनिधि और स्वच्छ भारत मिशन जैसी मंत्रालय की विभिन्न प्रमुख योजनाओं का उल्लेख करते हुए, सचिव ने आगे कहा कि इन योजनाओं की अवधारणा कमजोर और हाशिए पर पड़े वर्गों पर ध्यान केंद्रित करते हुए बनाई गई है। ये सभी मिलकर एकीकृत और बहुआयामी रणनीति का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिसे सामाजिक समावेशन, जलवायु कार्रवाई और आर्थिक सशक्तिकरण के साथ बुनियादी ढांचे के विकास को प्राप्त करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

इस कार्यक्रम में आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले संगठनों के प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया, जिनमें हाउसिंग फॉर ऑल (एचएफए) प्रभाग, हुडको, एनसीएचएफ, एनएचबी, सीजीईडब्ल्यूएचओ, हुडको और बीएमटीपीसी शामिल थे। एचएफए प्रभाग ने ‘कम्पेंडियम ऑफ गुड’ का विमोचन किया, जिसमें प्रधानमंत्री आवास योजना – शहरी (पीएमएवाई-यू) के सफल कार्यान्वयन में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपनाई गई सर्वोत्तम प्रथाओं का सार प्रस्तुत किया गया है।
इस अवसर पर एनएचबी, सीजीईडब्ल्यूएचओ, हुडको और बीएमटीपीसी द्वारा विशेष रूप से सक्षम बच्चों सहित स्कूली बच्चों के लिए आयोजित चित्रकला प्रतियोगिताओं के विजेताओं के लिए पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया।

‘विकसित भारत 2047’ के विज़न के अनुरूप, ‘शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों का महानगरीय शहरों में एकीकरण’, ‘शहरी बाढ़ को समझना और उसका समाधान’ और ‘समतापूर्ण शहर’ जैसे विषयों पर विभिन्न पैनल चर्चाएँ आयोजित की गईं। इन चर्चाओं में नीति निर्माताओं, पेशेवरों, शोधकर्ताओं, विषय विशेषज्ञों, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों और अनुसंधान संगठनों ने भाग लिया और शहरों को समावेशी, रहने योग्य, समतापूर्ण और टिकाऊ बनाने के लिए अपने विचार साझा किए। इस बात पर ज़ोर दिया गया कि कोई भी नागरिक पीछे न छूटे।



