छत्तीसगढ़ में समाज कल्याण विभाग से जुड़ा एक बड़ा NGO घोटाला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था की नींव को हिला दिया है। इस घोटाले की जानकारी सबसे पहले 2016 में सामने आई थी, जब विभाग में कार्यरत संविदा कर्मचारी कुंदन ठाकुर ने अपने अधिकारों की जानकारी लेने के लिए समाज कल्याण विभाग से संपर्क किया। इसी प्रक्रिया में उन्हें पता चला कि उनके नाम पर किसी दूसरी जगह से 2012 से वेतन जारी हो रहा है, जबकि वे स्वयं मठपुरैना स्वावलंबन केंद्र में संविदा पर कार्यरत थे।
संदेह होने पर कुंदन ने RTI (सूचना का अधिकार) लगाया और पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने आई। जांच में पाया गया कि रायपुर और बिलासपुर में कई कर्मचारी ऐसे हैं, जिनके नाम पर दो-दो जगह वेतन निकाला जा रहा था। कुंदन ने अन्य कर्मचारियों से संपर्क किया, लेकिन किसी ने उनका साथ नहीं दिया। जब मामला अदालत तक पहुँचा, तो कुंदन को नौकरी से निकाल दिया गया।
CBI ने इस पूरे घोटाले की जांच अपने हाथ में ली है। CBI की टीम ने समाज कल्याण विभाग के दफ्तर पहुंचकर संबंधित दस्तावेज जब्त किए हैं। अधिकारियों ने NGO से जुड़े तीन बंडल दस्तावेजों की फोटोकॉपी लेकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में एक मंत्री और 7 IAS अधिकारियों समेत कुल 14 लोगों के नाम सामने आए हैं।
इस घोटाले की जड़ें 2004 तक जाती हैं, जब तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री रेणुका सिंह, रिटायर्ड IAS विवेक ढांढ, MK राउत, डॉ. आलोक शुक्ला, सुनील कुजूर, बी.एल. अग्रवाल, सतीश पांडे और पीपी श्रीवास्तव ने मिलकर दो NGO बनाए थे। इन संस्थाओं का उद्देश्य दिव्यांगों की मदद करना था—जैसे व्हीलचेयर, ट्राईसाइकिल, कृत्रिम अंग और सुनने की मशीनें उपलब्ध कराना।
लेकिन हकीकत में इन NGO को केवल कागजों पर सक्रिय दिखाया गया, जबकि जमीन पर उनका कोई अस्तित्व नहीं था। समाज कल्याण विभाग से इन्हें कोई मान्यता भी नहीं मिली थी, फिर भी केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के करोड़ों रुपये इन NGO के खातों में ट्रांसफर किए जाते रहे।
नियमों के अनुसार किसी भी सरकारी कर्मचारी को NGO का सदस्य बनने की अनुमति नहीं होती, लेकिन इस घोटाले में कई वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों ने नियमों की अनदेखी कर संस्थाएं गठित कीं। 17 सालों तक इन NGO में न तो चुनाव हुआ, न कोई बैठक हुई, न ऑडिट, फिर भी सरकारी फंड का दुरुपयोग जारी रहा।
CBI की प्रारंभिक जांच में यह साफ हुआ है कि यह करोड़ों का भ्रष्टाचार है, जिसमें उच्च पदस्थ अधिकारी और नेता शामिल हैं। जांच एजेंसी ने अब मामले की फाइलें जब्त कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।







