बिहार में भाजपा और लोजपा (रामविलास) के बीच सीट बंटवारे को लेकर जारी तनाव में अमित शाह के हस्तक्षेप के बाद चिराग पासवान का रुख थोड़ा सा नरम हुआ है। हालांकि, पार्टी ने स्पष्ट किया है कि अभी तक सीटों पर कोई औपचारिक वार्ता नहीं हुई है।
भाजपा के प्रदेश व केंद्रीय नेताओं से संपर्क में न रहने की खबरों के बीच शाह की एंट्री ने राजनीतिक तापमान को नीचे लाया है। सूत्र बताते हैं कि अमित शाह की पहल पर चिराग व भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान के बीच बातचीत हुई, लेकिन लोजपा प्रवक्ता धीरेंद्र मुन्ना ने कहा कि अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ।
चिराग की मांग लगभग 40 सीटों की बताई जा रही है। अलावा इसके, वे पांच प्रमुख सीटों — गोविंदगंज, ब्रह्मपुर, अतरी, महुआ और सिमरी बख्तियारपुर — को लेकर ज़ोर दे रहे हैं। भाजपा के प्रस्ताव उन्हें संतोष नहीं दे पा रहे।
राजग के लिए चिराग को नाराज करना आसान नहीं होगा क्योंकि 2020 में उनकी पार्टी ने अलग राह अपनाकर गठबंधन को चित कर दिया था। इसलिए इस बार भाजपा नेतृत्व चाहता है कि वह चिराग कोाकर्षित कर एकता कायम रखे।
अतिरिक्त बिंदु
- चिराग के मोबाइल ऑफ होने की चर्चाओं पर लोजपा का कहना है कि वह “Out of reach” हो सकते हैं, लेकिन पार्टी उनसे जुड़े हैं।
- भाजपा इस बार 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।
- जदयू, मांझी, उपेंद्र कुशवाहा जैसे अन्य सहयोगी दल भी बड़ी सीटों की मांग कर रहे हैं, लेकिन लोजपा के साथ गहन वार्ता सबसे जटिल साबित हो सकती है।







