रायपुर। केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को जारी किए गए ₹1,01,603 करोड़ के अग्रिम कर अंशदान को लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। राज्य के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने इस राशि को उपलब्धि बताते हुए केंद्र का आभार जताया है, वहीं विपक्ष और जनता के प्रतिनिधि आरोप लगा रहे हैं कि छत्तीसगढ़ को मिला मात्र ₹3,462 करोड़ का हिस्सा राज्य की वास्तविक ज़रूरतों के हिसाब से बहुत कम है।
सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह बँटवारा वास्तव में न्यायसंगत है, या फिर “डबल इंजन” का नारा बड़े राज्यों के हित में ही काम करता है?

वित्त मंत्री का बयान
ओ.पी. चौधरी ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को कुल ₹1,01,603 करोड़ दिए हैं, जिसमें छत्तीसगढ़ को ₹3,462 करोड़ प्राप्त हुए हैं।

अन्य राज्यों को मिला बड़ा हिस्सा
- उत्तर प्रदेश (UP): ₹18,227 करोड़
- मध्य प्रदेश (MP): ₹7,976 करोड़
- महाराष्ट्र (MH): ₹6,418 करोड़
- बिहार (Bihar): ₹10,219 करोड़
जनता का आरोप: गुमराह कर रहे ओ.पी. चौधरी?
जनता का कहना है कि खनिज संपदा से भरपूर छत्तीसगढ़ केंद्र को भारी राजस्व देता है, लेकिन बदले में उसे बहुत कम हिस्सा मिल रहा है। आरोप है कि सरकार इस छोटी राशि को ‘बड़ी सफलता’ बताकर जनता को गुमराह कर रही है। लोगों का तर्क है कि “डबल इंजन सरकार” कहने वाली पार्टी को अपने राज्य के लिए विशेष अनुदान (Special Grants) लाने पर जोर देना चाहिए था, न कि कम राशि पर संतोष करना चाहिए।
जनहित का सवाल
क्या छत्तीसगढ़ को मिली यह राशि राज्य के विकास और योजनाओं को गति दे पाएगी, जैसा दावा किया गया है, या फिर यह सिर्फ त्योहारों के खर्च तक ही सीमित रह जाएगी? जनता इस पर स्पष्ट जवाब चाहती है।



