हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी की ऐतिहासिक जीत, एनएसयूआई नोटा से भी पीछे

Madhya Bharat Desk
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हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी (HCU) छात्र संघ चुनाव 2025 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए सभी प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की। लंबे समय से वामपंथी और दलित छात्र संगठनों का दबदबा रहा इस कैंपस में एबीवीपी का यह नतीजा ऐतिहासिक माना जा रहा है।

एबीवीपी ने किया क्लीन स्वीप

छात्र संघ के अध्यक्ष पद पर शिवा पालेपू ने जीत हासिल की, जबकि देवेंद्र उपाध्यक्ष चुने गए। महासचिव पद पर श्रुति विजयी रहीं और संयुक्त सचिव पद सौरभ शुक्ला को मिला। वहीं, ज्वाला प्रसाद खेल सचिव और वीनस सांस्कृतिक सचिव बने। सिर्फ पदाधिकारी ही नहीं, बल्कि काउंसलर और बोर्ड सदस्य पदों पर भी एबीवीपी ने बहुमत दर्ज किया।

छह साल का वामपंथी दबदबा टूटा

पिछले छह वर्षों से एचसीयू कैंपस में वामपंथी गुटों का वर्चस्व बना हुआ था। कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई और दलित छात्र संगठनों के साथ मिलकर वामपंथी संगठन लगातार एबीवीपी को चुनौती देते रहे। लेकिन इस बार समीकरण पूरी तरह पलट गया।

एबीवीपी प्रवक्ता अंतरिक्ष ने कहा, “यह जीत छात्रों की राष्ट्रवादी सोच और विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एकजुट प्रयास का प्रतीक है। खासकर सोशल साइंस विभाग जैसे वामपंथी गढ़ों में जीत यह दर्शाती है कि छात्र अब वैचारिक दबाव से मुक्त होकर अपना निर्णय ले रहे हैं।”

एनएसयूआई की करारी हार

इस चुनाव की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कांग्रेस से जुड़ा एनएसयूआई इस बार नोटा (NOTA) से भी कम वोट ला सका। यह नतीजा तब आया है जब राज्य में कांग्रेस की सरकार है। हालांकि, एनएसयूआई का एचसीयू में कभी भी बड़ा आधार नहीं रहा, लेकिन वामपंथी संगठनों के साथ गठजोड़ करके वह हमेशा चुनावी समीकरण में शामिल रहा है।

छात्रों का विश्वास एबीवीपी के साथ

एबीवीपी का कहना है कि संगठन ने लगातार छात्र हितों की लड़ाई लड़ी है। कैंपस में शांति बनाए रखने, एचसीयू की जमीन की सुरक्षा करने और छात्रों की समस्याओं को लेकर आंदोलनों में भाग लेने से संगठन ने छात्रों का भरोसा जीता है।

एबीवीपी की ओर से जारी बयान में कहा गया, “यह जीत एचसीयू के इतिहास में एक मील का पत्थर है। यह नतीजे साबित करते हैं कि छात्र समुदाय एबीवीपी की नीतियों और राष्ट्रवादी सोच पर भरोसा जता रहा है।”

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