बालाघाट/मध्यप्रदेश। ग्राम सोनपुरी में विश्वकर्मा आदर्श लोहार समाज संगठन उकवा के तत्वावधान में भव्य रूप से विश्वकर्मा जयंती का आयोजन किया गया। हर वर्ष की तरह इस बार भी विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर (कन्या संक्रांति के अवसर पर) संपन्न हुई। मान्यता है कि इसी दिन सूर्य देव कन्या राशि में प्रवेश करते हैं, इसलिए भगवान विश्वकर्मा की जयंती इसी तिथि को मनाई जाती है।
आयोजन की शुरुआत भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापना से हुई। इसके पश्चात हवन, पूजन और भंडारा वितरण का कार्यक्रम संपन्न हुआ।
विश्वकर्मा जयंती का महत्व
- कन्या संक्रांति आधारित: सूर्य देव के कन्या राशि में गोचर करने के आधार पर पूजा की जाती है।
- सृष्टि के शिल्पकार: भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का प्रथम इंजीनियर और दिव्य शिल्पकार माना जाता है।
- यंत्रों व औजारों की पूजा: कारीगर, इंजीनियर और उद्योग जगत से जुड़े लोग अपने उपकरणों और मशीनों की पूजा करते हैं।
- सफलता और उन्नति का दिन: माना जाता है कि इस दिन की गई पूजा से कार्यक्षेत्र की बाधाएं दूर होती हैं और व्यवसाय में तरक्की मिलती है।
आयोजन में उपस्थित अतिथि
ग्राम सोनपुरी सरपंच सुनील उइके, समाजसेवी संदीप गजभिये, अमन गौतम, राजेश तेकाम, विश्वकर्मा आदर्श लोहार समाज के सदस्य शालिक राम बावने, राजू पंन्द्राम, धूप सिंह सोनवाने, दिरपाल, नरेश पथिए, दीपक सांसवार, पीरथ लाल, राजेंद्र एवं समस्त विश्वकर्मा परिवार ने उपस्थित होकर इस पावन अवसर को सफल बनाया।



