बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। इस याचिका में निजी मेडिकल कॉलेजों द्वारा छात्रों से मनमानी फीस वसूली का गंभीर मुद्दा उठाया गया। मेडिकल छात्रा प्रतीक्षा जांगड़े ने यह याचिका दायर की थी। उनका आरोप है कि प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेज हॉस्टल और ट्रांसपोर्ट सुविधाओं का उपयोग न करने वाले छात्रों से भी इन सेवाओं की पूरी फीस वसूल रहे हैं।
छात्रा का कहना है कि यह वसूली पूरी तरह अवैध है क्योंकि कॉलेज वास्तविक सुविधाएं उपलब्ध ही नहीं कराते। कई छात्र अपने घरों से कॉलेज आते-जाते हैं और हॉस्टल में नहीं रहते। इसके बावजूद उनसे हॉस्टल व ट्रांसपोर्ट शुल्क लिया जाता है। यह स्थिति फीस रेगुलेटरी कमेटी द्वारा तय नियमों का सीधा उल्लंघन है और छात्रों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ाती है।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। अदालत ने सभी निजी मेडिकल कॉलेजों से जवाब तलब करते हुए स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। यह कदम न केवल छात्रों के हित में है बल्कि शिक्षा संस्थानों की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।







