छत्तीसगढ़ की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर प्रदेशभर में “छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव – 25 वर्षों का उत्सव, वर्षों का संकल्प” के तहत विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी श्रृंखला में शासकीय नवीन महाविद्यालय, माना कैंप रायपुर में व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर स्वामी विवेकानंद के छत्तीसगढ़ प्रवास, उनके चिंतन और युवाओं के प्रति उनके संदेश पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में प्रसिद्ध इतिहासकार और पुरातत्ववेत्ता आचार्य रमेंद्रनाथ मिश्र ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार उन्होंने छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक और पुरातात्त्विक सत्यों को प्रमाणित कर समाज के समक्ष प्रस्तुत किया। आचार्य मिश्र ने स्वामी विवेकानंद के रायपुर प्रवास से जुड़े ऐतिहासिक क्षणों को विद्यार्थियों के साथ साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विवेकानंद रायपुर में सिटी कोतवाली चौक, गांधी मैदान के पीछे और माधवराव सप्रे स्कूल के पास हरिनाथ डे के घर रुके थे। इस दौरान वे स्नान हेतु बूढ़ा तालाब जाया करते थे, जिसके कारण आज वहां विवेकानंद की विशालकाय प्रतिमा स्थापित है।
उन्होंने कहा कि वे स्वयं विवेकानंद से इतने प्रभावित थे कि उनके रायपुर प्रवास से जुड़े सभी स्थलों को चिन्हित कर शासन के सहयोग से धरोहर स्वरूप सुरक्षित करवाने का प्रयास किया। अपने व्याख्यान में उन्होंने विवेकानंद के प्रसिद्ध शिकागो भाषण की भी व्याख्या की और गुरु-शिष्य परंपरा में रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद के संबंध को विस्तार से समझाया। साथ ही विद्यार्थियों को बौद्धिक ईमानदारी और सकारात्मक सोच अपनाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय प्रमुख डॉ. कीर्ति तिवारी ने की। उन्होंने विकसित छत्तीसगढ़ 2047 के दृष्टिकोण को विद्यार्थियों के सामने रखा और कहा कि अगले 25 वर्षों की जिम्मेदारी आज के युवाओं की है। विवेकानंद और युवा ऊर्जा पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी शक्ति को पहचानें और सकारात्मक कार्यों पर केंद्रित रहें।
कार्यक्रम का संचालन इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. चौलेश्वर चंद्राकर ने किया। प्रारंभिक उद्बोधन डॉ. सपना कार ने दिया और आभार प्रदर्शन डॉ. संजू पूनम साहू द्वारा किया गया। इस अवसर पर सांसद प्रतिनिधि निमाई विश्वास, डॉ. स्वामि शर्मा, सीमा कुजुर, नर्गिस एनेश्वरी सहित महाविद्यालय के सभी विद्यार्थी उपस्थित रहे।
यह व्याख्यानमाला न केवल छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास से विद्यार्थियों को परिचित कराती है, बल्कि उन्हें स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों के विचारों से प्रेरणा लेकर भविष्य निर्माण हेतु संकल्पित होने का अवसर भी प्रदान करती है।







