दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही की जाए, किसानों के लिए मुसीबत बना एग्री स्टैक पोर्टल

Madhya Bharat Desk
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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों के हित में शुरू किया गया एग्री स्टैक पोर्टल अब किसानों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। पोर्टल में लगातार आ रही तकनीकी खामियों और अधूरे रिकॉर्ड के चलते किसानों का पंजीयन अधर में लटक गया है, जिससे वे कई महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं से वंचित होने के खतरे में हैं।

केवल 50% किसानों का हुआ पंजीयन

सूत्रों के अनुसार, राज्य में अब तक केवल आधे किसान ही पोर्टल पर अपना पंजीयन करा पाए हैं। बाकी किसान तकनीकी गड़बड़ियों और प्रशासनिक लापरवाही के कारण योजना से बाहर होने की आशंका से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति सीधे किसानों की आजीविका पर गंभीर असर डाल सकती है, क्योंकि पंजीयन के बिना वे कई लाभों से वंचित रह जाएंगे।

अधूरे रिकॉर्ड बने रोड़ा

किसानों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पोर्टल पर केवल 2023 तक के ही रिकॉर्ड अपडेट किए गए हैं। नई खरीदी गई जमीन, नामांतरण और बंटवारे की प्रविष्टियां दर्ज न होने से किसानों को बार-बार तहसील और पटवारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इसके बावजूद उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं मिल रहा है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है।

योजनाओं से वंचित होने का खतरा

एग्री स्टैक पोर्टल पर सफल पंजीयन के बिना किसानों को कई महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाएगा। इसमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना और समर्थन मूल्य पर धान खरीदी जैसी योजनाएं शामिल हैं। ग्रामीण इलाकों से मिली रिपोर्ट बताती है कि यदि समय पर पंजीयन पूरा नहीं हुआ तो हजारों किसान बीमा, मुआवजा और अन्य सरकारी सुविधाओं से वंचित हो सकते हैं।

किसानों की मांग

इस स्थिति से परेशान किसानों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि पोर्टल की तकनीकी समस्याओं को तुरंत ठीक किया जाए और पंजीयन की समयसीमा को बढ़ाया जाए। साथ ही, इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्यवाही की मांग भी जोर पकड़ रही है।

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