मधुबनी, बिहार। बिहार की राजनीति में मधुबनी एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है। पलायन की मार झेल रहे इस जिले में लाखों युवाओं का दर्द साफ झलकता है। रोजगार के अभाव में यहां के नौजवान राज्य से बाहर जाने को मजबूर हैं और यही मुद्दा अब सियासत के केंद्र में आ गया है।
प्रशांत किशोर की सभा में उमड़ी ऐतिहासिक भीड़ ने सबका ध्यान खींचा। सभा स्थल तक पहुंचने में उन्हें पूरे दो घंटे लग गए क्योंकि रास्ते भर समर्थकों का जनसैलाब उमड़ा हुआ था। जगह-जगह खड़े लोग इस बात का संकेत दे रहे थे कि अब जनता बदलाव चाहती है और उनकी आवाज दबने वाली नहीं है।
सभा के दौरान युवाओं का जोश देखने लायक था। नारों और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच गूंजते रहे ये शब्द—
“जिस ओर जवानी चलती है, उस ओर जमाना चलता है।”
यह भीड़ सिर्फ किसी नेता के लिए नहीं, बल्कि अपने हक, रोजगार और भविष्य की लड़ाई के लिए जुटी थी। मधुबनी का यह जनसमर्थन एक बड़ा राजनीतिक संदेश दे रहा है कि आने वाले वक्त में बिहार की सियासत का एजेंडा बदल सकता है।







