छत्तीसगढ़ में मेडिकल कॉलेजों की एडमिशन प्रक्रिया के दौरान बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां तीन छात्राओं ने फर्जी EWS (Economically Weaker Section) सर्टिफिकेट का इस्तेमाल कर एमबीबीएस में प्रवेश लेने की कोशिश की। वेरिफिकेशन के दौरान यह गड़बड़ी उजागर हुई।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पकड़ी गई छात्राओं में एक भाजपा नेता की भतीजी भी शामिल है। उसने गलत दस्तावेज़ लगाकर आरक्षण का फायदा उठाने की कोशिश की। बाकी दो छात्राएं भी दस्तावेज़ जांच के दौरान फंस गईं।
यह घटना बताती है कि कैसे कुछ लोग योग्य उम्मीदवारों का हक मारकर सीट पाने की कोशिश करते हैं। मेडिकल शिक्षा जैसे अहम क्षेत्र में इस तरह का फर्जीवाड़ा न केवल कानून के खिलाफ है बल्कि समाज के प्रति भी अन्याय है। जांच एजेंसियां अब मामले की पड़ताल कर रही हैं ताकि दोषियों पर कार्रवाई की जा सके।
इस प्रकार की घटनाएं सरकार और प्रशासन दोनों के लिए चुनौती हैं, क्योंकि यह न केवल शिक्षा व्यवस्था में भरोसे को तोड़ती हैं बल्कि मेहनती और deserving छात्रों के भविष्य को भी प्रभावित करती हैं। कड़े कदम उठाकर ही ऐसी धोखाधड़ी पर रोक लगाई जा सकती है।







