रायपुर। छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन के नाम पर एक बार फिर भ्रष्टाचार का बड़ा मामला उजागर हुआ है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में घर-घर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन वास्तविकता यह है कि योजना की आड़ में विभागीय अफसर और मंत्री मिलकर करोड़ों की हेराफेरी कर रहे हैं।
मिशन के अंतर्गत पानी सप्लाई के लिए अनिवार्य उपकरणों जैसे इलेक्ट्रो क्लोरिनेटर सिस्टम और सबमर्सिबल पंप की खरीदी में भारी गड़बड़ी सामने आई है। विभाग ने जिन कंपनियों को इस काम के लिए इंपैनल किया है, वे कंपनियां ठेकेदारों को यह मशीनें डेढ़ लाख से लेकर पौने दो लाख रुपए तक में उपलब्ध करा रही हैं। जबकि आश्चर्य की बात यह है कि यही क्लोरिनेटर और सबमर्सिबल पंप खुले बाजार में महज 40,000 से 50,000 रुपए की कीमत पर आसानी से खरीदे जा सकते हैं।
कीमत में इतना बड़ा अंतर खुद ही इस बात का सबूत है कि खरीदी की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है। यह पूरा खेल विभागीय अधिकारियों और मंत्री की मिलीभगत के बिना संभव नहीं हो सकता। आरोप है कि योजनाओं का पैसा गरीब और आम जनता के लिए खर्च होने के बजाय अफसरों और नेताओं की जेब में जा रहा है।

विभागीय आदेशों के अनुसार 6 अक्टूबर 2023 और 22 फरवरी 2024 को जारी दस्तावेजों में जिन कंपनियों को चुना गया, उनमें Agil Power Control System, Pristine Water, Hydrapure Technologies, SRE Senthil Engg. Company, Harambh Chemicals Pvt. Ltd., RSVP Chloro Tech, UNICARE Technologies और Exotic Elements का नाम साफ-साफ दर्ज है। इन कंपनियों से महंगे दामों पर खरीदी कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य लोगों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना था, लेकिन जिस तरह से भ्रष्टाचार की परतें खुल रही हैं, उससे योजना की साख पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जनता के टैक्स के पैसे का खुलेआम बंदरबांट हो रहा है और जल जीवन मिशन “हर घर जल” के बजाय “हर घर घोटाला” का प्रतीक बनता जा रहा है। कार्यों की जानकारी लेने एडिशनल MD को फोन तक किया गया लेकिन उन्होंने फोन तक नहीं उठाया।
अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार इस बड़े घोटाले पर चुप्पी साधे रहती है या फिर उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई करती है। जनता इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग रही है कि आखिर क्यों गरीबों के हक का पैसा इस तरह से लूटा जा रहा है और कब तक ऐसी योजनाओं को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने दिया जाएगा।







