रायपुर।छत्तीसगढ़ सरकार अब धर्म परिवर्तन कर चुके अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लोगों को सरकारी योजनाओं और आरक्षण का लाभ नहीं देगी। इस दिशा में विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार आगामी शीतकालीन विधानसभा सत्र में एक कठोर कानून लाने की तैयारी में है। इस कानून का उद्देश्य अवैध धर्मांतरण और दोहरे लाभ पर प्रभावी रोक लगाना है।
एसटी मतांतरितों पर सख्ती की तैयारी
विधि एवं विधायी कार्य मंत्री अरुण साव ने स्पष्ट किया कि सरकार वर्तमान कानूनों को और अधिक मजबूत और व्यापक बना रही है। मौजूदा समय में धर्म परिवर्तन कर चुके अनुसूचित जाति (SC) वर्ग को आरक्षण का लाभ नहीं मिलता, लेकिन एसटी वर्ग में ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है, जिससे मतांतरित आदिवासी आरक्षण और अल्पसंख्यक योजनाओं दोनों का लाभ उठा रहे हैं।
101 मामलों में सामने आया अवैध मतांतरण
राज्य सरकार के अनुसार, पिछले दो वर्षों में राज्य में 101 धर्मांतरण के मामले सामने आए हैं, जिनमें से 44 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है। सिर्फ पिछले एक साल में 23 नए प्रकरण सामने आए हैं, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
नया विधेयक: सख्त प्रावधान और भारी सजा
प्रस्तावित नए कानून में यह अनिवार्य होगा कि कोई भी व्यक्ति धर्म परिवर्तन से कम से कम 60 दिन पूर्व जिला प्रशासन को इसकी जानकारी दे। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो 10 साल तक की जेल और आर्थिक दंड का प्रावधान होगा।
इसके साथ ही प्रलोभन, भय या बलपूर्वक धर्म परिवर्तन को भी अपराध की श्रेणी में लाकर उसकी परिभाषा को और अधिक व्यापक किया जा रहा है।
यह कानून छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 की जगह लेगा, जिसमें अब तक जबरन धर्मांतरण पर केवल 1 वर्ष की सजा और 5,000 रुपए का जुर्माना निर्धारित था।
राज्य सरकार का यह कदम आदिवासी पहचान और संवैधानिक संरचना को बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है। प्रस्तावित कानून पर आने वाले दिनों में सियासी बहस और सामाजिक चर्चा और तेज हो सकती है।







